चुनावी साल में इन कथावाचकों की भारी मांग, कितनी है फीस और इतनी सीटों पर है इनका असर

भोपाल : मध्यप्रदेश में जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे राज्य में कथावाचकों की डिमांड बढ़ने लगी है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में पंडित धीरेंद्र शास्त्री, पंडित प्रदीप मिश्रा और जया किशोरी की कथा करवाने की होड़ सी मची हुई है। प्रदेश में इन बाबाओं और कथावाचकों का करीब 100 से सीटों पर प्रभाव है। इसलिए हर कोई नेता अपने क्षेत्र में इनका आयोजन करवाना चाहता है ताकि कथा के जरिए वे लोगों के वोट तक पहुंच सके।

पड़ताल में सामने आया कि, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, कुबेरेश्वर धाम के प्रदीप मिश्रा और पंडोखर सरकार गुरुशरण शर्मा का प्रदेश की 230 में से 100 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा प्रभाव है। यहीं कारण है कि शिवराज सरकार के मंत्रियों के अलावा कांग्रेस—भाजपा के विधायक भी इनकी कथा करवाने के लिए लाइन में लगे है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का प्रभाव बुंदेलखंड सहित आसपास की 50 विधानसभा सीटों पर है।

जबकि कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा मालवा-निमाड़, भोपाल और नर्मदापुरम अंचल के 40 विधानसभा क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं। इसी तरह पंडोखर सरकार गुरुशरण शर्मा पर आस्था रखने वाले ग्वालियर-चंबल और भाेपाल संभाग के 30 विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा हैं। इन सभी में 80 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां तीनों बाबाओं का प्रभाव दिख रहा है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभाओं में 103 विधानसभा सीटें ऐसी जहां किसी ने किसी संत या आश्रम का प्रभाव है।

बाबाओं का प्रभाव बदल सकता है परिणाम

प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, प्रदेश में इन दिनों बाबाओं की कथाओं की होड़ मची हुई हैं। जनता के बीच भी यह बाबा लोग अच्छे खासे लोकप्रिय हो रहे है। कोई शिव की कथा कर रहा है तो कोई हनुमान जी की। लाखों लोग इनकी कथा में शामिल होते है। यही भीड़ को राजनीतिक लाभ में बदलने की महत्वाकांक्षा इन नेताओं को बाबाओं की चौखट पर आने के लिए मजबूर कर रही है।

हिंदू राष्ट्र की मुहिम छेड़ चुके धीरेंद्र शास्त्री को भाजपा खुद के अधिक नजदीक पाती है। बुंदेलखंड, महाकौशल, बघेलखंड और ग्वालियर-चंबल की लगभग 50 सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है।

प्रदीप मिश्रा का मालवा-निमाड़ सहित भोपाल और नर्मदापुरम अंचल की 40 सीटों पर प्रभाव है। कथा वाचक जया किशोरी का भी मालवा-निमाड़ में अच्छा प्रभाव है। युवाओं और महिलाओं का झुकाव उनकी तरफ है।

पंडोखर सरकार का भोपाल के साथ ग्वालियर संभाग की 30 सीटों पर प्रभाव है। इसमें 80 सीटें ऐसी हैं, जहां तीनों ही बाबाओं का संयुक्त प्रभाव है।

प्रदेश में अवधेशानंद गिरी, देवकीनंदन ठाकुर सहित दूसरे संत और कथावाचकों का भी प्रभाव माना जाता है।

प्रदेश में पिछली बार 10 सीटों पर जीत-हार का अंतर एक हजार से भी कम था। 18 सीटों पर अंतर 2 हजार से कम का और 30 सीटों पर तीन हजार और 45 सीटों पर पांच हजार वोटों का अंतर था। हर चुनाव में 40 से 50 सीटें ऐसी होती हैं, जहां जीत-हार का मार्जिन पांच हजार से कम रहता है। ऐसे में इन बाबाओं के प्रभाव से परिणाम बदल भी सकते हैं।

साल 2018 में नर्मदा और क्षिप्रा नदी की सफाई को लेकर साधु-संतों ने इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया, जिसका असर उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम आदि विधानसभा सीटों में देखने को मिला था। इसकी वजह से महाकौशल में बीजेपी को नुकसान का सामना करना पड़ा था।

इन कथावाचकों का भी है जबरदस्त प्रभाव

आरएसएस के करीबी कहे जाने वाले संत उत्तम स्वामी का आशीर्वाद लेने के लिए भी नेताओं की होड़ लगी है। वे भी भागवत कथा के लिए जाने जाते है। आए दिन भाजपा से जुड़े कई बड़े नेता इनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते है। मालवा निमाड़ में इनका अच्छा खासा प्रभाव है।

आगरा के प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर भारतीय संस्कृति के साथ भाजपा के पक्षधर माने जाते है। पिछले साल उज्जैन में इनकी कथा में भारी भीड़ देखी गई थी। इस आयोजन में अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा नेताओं ने ही तन,मन और धन से सेवा की थी। चुनाव को देखते हुए मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी देवकीनंदन ठाकुर की कई कथा होनी है।

इनके अलावा भिंड जिले के लहार में रावतपुरा सरकार का मंदिर स्थित है। संत रविशंकर महाराज को रावतपुरा सरकार के नाम से प्रसिद्धि मिली है। इनके आश्रम के पास हनुमान जी का विशालकाय मंदिर है। राजनीतिक तौर पर रावतपुरा सरकार के पास मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भी इनका असर है।

हर बड़ी पार्टी का छोटा-बड़ा नेता यहां कभी न कभी नतमस्तक होकर गया है। संत रामभद्राचार्य मौजूदा समय में चार जगतगुरु में से एक हैं। भोपाल में हुए बड़े कथा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया था।

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