ओटीटी पर धमाल मचाने को तैयार ‘मौड़’, हिंदी भाषा में भी फिल्म का लुफ्त उठा सकेंगे दर्शक

मुंबई : वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जी5 जल्द ही ‘मौड़’ के विश्व डिजिटल प्रीमियर के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म में एमी विर्क, देव खरौद, विक्रमजीत विर्क, अमीक विर्क, नाइकरा कौर और कुलजिंदर सिद्धू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। जतिंदर मौहर द्वारा निर्देशित और रिदम बॉयज और नाद स्टूडियोज द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म का प्रीमियर 21 जुलाई को विशेष रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर होगा।

देश के विभाजन से पहले के पंजाब पर आधारित यह कहानी एक पंजाबी ग्रामीण जियोना मौड़ के जीवन का वर्णन करती है, जिसने अपने दस्यु भाई किशना की मौत का बदला लेने के लिए पिस्तौल उठाई थी। जियोना शोषक भूमि कर माफिया को ध्वस्त करने के लिए कृतसंकल्प थे। साथ ही वह डोगर, एक अन्य जिसने किशना को धोखा दिया था,उससे भी बदला लेने के लिए दृढ़ संकल्पित है। ‘मौड़’ ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान पंजाब के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य की पड़ताल करता है और उनके सपनों, संघर्षों और भावनाओं को दर्शाता है। इतिहास के प्रति उत्साही लोगों को इस फिल्म की कहानी स्क्रीन से बांधे रखने में पूरा माद्दा रखती है। फिल्म दो गुमनाम नायकों की कहानी है, जिन्हें गरीबों के मसीहा के रूप में जाना जाता है। यह पंजाबी फिल्म हिंदी में भी उपलब्ध होगी।

इस बारे में बात करते हुए निर्देशक जतिंदर मौहर ने कहा, “मौड़ जैसी फिल्म का निर्माण करने के बाद मैं पंजाबी फिल्म डोमेन को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और संस्कृतियों तक पहुंचाना चाहता हूं। यह एक दिलचस्प कहानी है जो जियोना और किशना के जीवन की गहराई से पड़ताल करती है जो अपनी भूमि की रक्षा के लिए ब्रिटिश शासकों और देशी राजाओं के अन्याय का सामना करते हैं। अभिनेता फिल्म में भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं और इसे देखने लायक बनाते हैं। मुझे खुशी है कि ZEE5 के साथ दर्शकों का एक बड़ा समूह इसे देख सकेगा।

वहीं, अभिनेता एमी विर्क ने कहा, “मौड़ पंजाब में डाकू बनने वाले दो भाइयों की यात्रा को चित्रित करती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो पंजाबी सिनेमा की ताकत और शक्ति का प्रतीक है। पंजाब के सुरम्य स्थानों में आत्मा के साथ फिल्माई गई है। उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए जियोना का किरदार निभाना आसान नहीं था। यह फिल्म चरित्र और विभाजन पूर्व के दौरान परेशान करने वाले राजनीतिक माहौल को चित्रित करते हुए राष्ट्रवाद की ज्वाला भड़काती है।”

फिल्म पर बात करते हुए देव खरौद कहते हैं, “मौड़ औपनिवेशिक काल की कहानी को  बताती है, जब गरीब लोग भ्रष्ट ब्रिटिश और जमींदारों द्वारा भेदभाव और दुर्व्यवहार का शिकार होते थे। निर्ममता से लेकर अस्पृश्यता और असमानता तक, फिल्म मानवता के धूसर रंगों को दर्शाती है। यह देखना निराशाजनक है कि कैसे शासक वर्ग ने गरीबों को नीचा दिखाकर अपना वर्चस्व स्थापित किया। भय और उत्पीड़न के भयावह औपनिवेशिक काल में डूबी मौड़ इतिहास का एक प्रामाणिक चित्रण है। मैं सभी से ZEE5 पर हमारी सार्थक फिल्म देखने का आग्रह करता हूं।”

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