महासमुंद में 1.5 करोड़ की एलपीजी  चोरी, महाराष्ट्र में छिपे थे मालिक-डायरेक्टर, पुलिस ने कोल्हापुर से किया गिरफ्तार

महासमुंद : महासमुंद में 1.5 करोड़ों के एलपीजी चोरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में 2 आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे. गुरुवार को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है.

खाद्य अधिकारी निकला मास्टरमांइड

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि खाद्य अधिकारी अजय यादव ही पूरे नेटवर्क का मास्टमाइंड था. आरोप है कि एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा दिलाने से लेकर फर्जी तौल पंचनामा तैयार करवाने तक, हर स्तर पर उसकी भूमिका सामने आई है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, खाद्य विभाग कार्यालय में ही फर्जी पंचनामों पर हस्ताक्षर कराए गए. इतना ही नहीं, गैस का स्टॉक जल्दी खाली करवाने और तौल नहीं कराने की साजिश में भी मिलीभगत सामने आई है.

आरोपियों ने बदले कई ठिकानें

वहीं एसपी प्रभात कुमार का कहना है कि जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयानों में अजय यादव की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई. उधर, मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और उसका बेटा सार्थक सिंह ठाकुर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार रायपुर, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर में ठिकाने बदल रहे थे. पुलिस ने 11 शहरों में टावर डंप, सीडीआर एनालिसिस, टोल डेटा और सोशल मीडिया ट्रैकिंग के जरिए दोनों आरोपियों का पीछा किया.

पुलिस ने कोल्हापुर से किया गिरफ्तार

आखिरकार कोल्हापुर के एक होटल में दोनों के छिपे होने की सूचना मिली, जिसके बाद महासमुंद पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से दबिश देकर पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आया कि करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी की गई. इन दोनों पर आरोप है कि आपदा का फायदा उठाकर गैस को बिना जीएसटी के अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बेचा गया. पुलिस ने बताया कि अप्रैल महीने में 40 टन गैस की खरीद दिखाई गई, लेकिन बिक्री 135 टन तक की गई.

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