Jyeshtha Amavasya : आज ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान-दान व पूजा पाठ का विशेष महत्व

आज ज्येष्ठ अमावस्या को स्नान, दान, पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। शहर के नर्मदा तटों पर सुबह से ही भक्तों का तांता लग रहा है। लोगों के सुबह से आने का क्रम देर शाम तक चलता रहेगा। ज्येष्ठ अमावस्या को जेठ अमावस्या, दर्श अमावस्या, भावुका अमावस्या इत्यादि नामों से पुकारते हैं। मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। धन उधार नहीं लेना चाहिए। कोई नई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। अमावस्या का प्रभाव विभिन्न राशियों के लोगों पर पड़ता है। इसलिए इस दिन गलत कार्यों से दूरी रखनी चाहिए और व्रत-उपासना इष्ट देव की आराधना करनी चाहिए।
निर्बल होती चंद्रमा की शक्ति
ज्येष्ठ अमावस के दौरान चंद्रमा की शक्ति निर्बल होती है। अंधकार की स्थिति अधिक होती है। इस वातावरण में नकारात्मकता का प्रभाव भी अधिक होता है। इसलिए इस समय पर तंत्र से संबंधित कार्य भी किए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है तांत्रिकों के लिए ये रात खास होती है, जब वे अपनी सिद्धियों से विभिन्न शक्तियों को जाग्रत करते हैं।
स्नान करने पर नकारात्मक तत्व होते हैं दूर
किसी भी अमावस्या के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने की महत्ता अत्यंत ही प्राचीन काल से चली आ रही है। पूर्णिमा के समान ही अमावस्या पर भी पवित्र नदियों में स्नान का महत्व है। इस दिन स्नान करने पर शरीर में मौजूद नकारात्मक तत्व दूर होते हैं। मानसिक बल मिल मिलता है और विचारों में शुद्धता आती है। शरीर निरोगी बनता है वहीं बुरी शक्तियां भी दूर रहती हैं। स्नान करने से विशेष ग्रह नक्षत्रों का भी लाभ प्राप्त होता है।
असमर्थ व गरीबों को दें दान
इस दिन असमर्थ एवं गरीबों को दान दें। ब्राह्मणों को भोजन करवाने से सहस्त्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। अमावस्या के दिन दूध से बनी वस्तुओं अथावा श्वेत वस्तुओं का दान करना चंद्र ग्रह के शुभ फल देने वाला होता है।
महत्वपूर्ण कार्य पितरों के निमित्त दान
इस तिथि को पितरों के लिए सभी कार्यों को करना चाहिए। इस दान को करने से नवग्रह दोषों का नाश होता है। ग्रहों की शांति होती है, कष्ट दूर होते हैं।
अमावस्या में क्या करें
गाय, कुते और कौओं को खाना खिलाएं। पीपल और बट वृक्ष का पूजन करें। पितरों के लिए तर्पण करें। पीपल पर सूत बांधें, कच्चा दूध चढ़ाएं। काले तिल का दान कर दीपक जलाना चाहिए।
हर तरह के संकटों का नाश
इस दिन उपासना से हर तरह के संकटों का नाश होता है। संतान प्राप्ति व संतान संबंधी समस्याओं का निवारण होता है। अपयश के योग दूर होते हैं। हर प्रकार के कार्यों की बाधा दूर होती है। कर्ज संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।