भारत का अग्नि प्राइम का सफल टेस्ट, जानें चीन-पाकिस्तान के खतरों को मात देने के लिए यह क्यों जरूरी?

नई दिल्ली : भारत ने नई पीढ़ी की बैलेस्टिक मिसाइल ‘अग्नि प्राइम’ को गुरुवार रात ओडिशा तट के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के इस परीक्षण के दौरान मिसाइल सभी मानकों पर खरी उतरी। पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव के बीच मिसाइल का यह परीक्षण भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए काफी अहम है।

अग्नि प्राइम में खास क्या है?

अग्नि प्राइम कई उन्नत एवं नई सुविधाओं से युक्त मिसाइल है। इसमें नई प्रणोदन प्रणाली और समग्र रॉकेट मोटर केसिंग के साथ-साथ उन्नत नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणाली शामिल की गई है। यह एक कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली पर आधारित मिसाइल है।

कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली क्या होती है?

एक कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली किसी मिसाइल को लॉन्च करने के समय को कम करती है। इसके साथ ही इसकी वजह से मिसाइल का परिचालन भी सुगम होता है। जरूरत पड़ने पर इसे रेल या सड़क मार्ग से आसनी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है।

इस मिसाइल की अन्य विशेषताएं क्या हैं?

अग्नि प्राइम अग्नि मिसाइल श्रृंखला की अगली पीढ़ी का उन्नत रूप है। इसकी रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर है। यह एक बैलिस्टिक मिसाइल है जिसमें दोहरी नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणाली है। यह अग्नि मिसाइल श्रृंखला की छठी बैलिस्टिक मिसाइल है।

अग्नि प्राइम एक दो चरण वाली मिसाइल है। यह आईजीएमडीपी (इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत विकसित मिसाइलों की अग्नि श्रृंखला में सबसे नई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के मिसाइल की कल्पना पूर्व राष्ट्रपति और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी।

मिसाइल अलग-अलग स्थानों पर कई हथियार ले जाने में सक्षम है। 10.5 मीटर लंबी यह मिसाइल 1.5 टन तक हथियार ले जा सकती है।

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