मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हेमंत सोरेन, हाईकोर्ट से वापस लेंगे अपनी याचिका

नई दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कथित भूमि घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी के साथ मिलकर तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सोरेन के मामले का उल्लेख किया।

सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले पर शुक्रवार (2 फरवरी) को सुनवाई के लिए सहमत हुए हैं। भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सोरेन ने इन्हीं प्रार्थनाओं के साथ झारखंड हाईकोर्ट में एक समान याचिका दायर की है, जिस पर हाईकोर्ट आज सुनवाई कर रहा है, तब सिब्बल ने कहा कि उक्त याचिका हाईकोर्ट से वापस ले ली जाएगी।

सिब्बल ने कहा, “इस अदालत को धारा 19 पीएमएलए की रूपरेखा तय करनी है…किसी व्यक्ति को इस तरह कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है…यह देश की राजनीति को प्रभावित करता है।”

सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “यह हाईकोर्ट के साथ अन्याय होगा क्योंकि, उनके अनुरोध पर मामले को पहले आज बोर्ड पर रखा गया और अब कल के लिए पोस्ट किया गया।” सिब्बल ने अपना वचन दोहराया कि हाईकोर्ट में याचिका वापस ले ली जाएगी।

सिब्बल ने दलील दी कि याचिका उल्लंघन के गंभीर मुद्दे उठाती है। जवाब में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सोरेन पर लगे आरोप भी बेहद गंभीर हैं।

हेमंत सोरेन ने कल मुख्यमंत्री पद से दिया था इस्तीफा

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धनशोधन के एक मामले में बुधवार रात को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, राज्य के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित भूमि धोखाधड़ी मामले से जुड़े धनशोधन के आरोपों को लेकर सात घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद बुधवार को हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया।

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