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लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सदन में शामिल हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, भाजपा नेताओं से गले मिले

Chhattisgarh February 23, 2026 रिपोर्टर: shailesh
लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सदन में शामिल हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, भाजपा नेताओं से गले मिले

लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सदन में शामिल हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, भाजपा नेताओं से गले मिले

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। पहले दिन सदन में राज्यपाल का अभिभाषण हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार के विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक रायपुर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनेगा और पिछले दो सालों में 532 नक्सली न्यूट्रलाइज्ड किए जा चुके हैं।

लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सदन पहुंचे पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा नेताओं से गले मिलकर मुलाकात की। उन्होंने अजय चंद्राकर, रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह को गले लगाया।

25 फरवरी को इस अभिभाषण पर चर्चा होगी। वित्तमंत्री ओ. पी. चौधरी ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। बजट, वित्तीय वर्ष 2026-27 का, कल यानी 24 फरवरी को पेश किया जाएगा। इसके साथ ही सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

नालंदा लाइब्रेरी, रिंग रोड बनेगी

सत्र से पहले स्पीकर रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक विधानसभा के समिति कक्ष में हुई। बैठक में सीएम साय, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत डिप्टी सीएम अरुण साव समेत मंत्री और समिति के सदस्य मौजूद रहे।

इस बार का बजट गुड गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और उद्योग पर केंद्रित रहेगा, साथ ही युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए खास योजनाएं लाई जाएंगी। जिलों में नालंदा लाइब्रेरी, शहरों में स्टेडियम और रिंग रोड बनाए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पीएम सूर्यघर और आयुष्मान योजनाओं के लिए भी बजट में बड़ा प्रावधान प्रस्तावित है।

एक साल बाद सदन में वापसी

शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा करीब एक साल तक जेल में रहे। इस दौरान वे विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके। अब उच्च न्यायालय की ओर से 3 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है।

इसके बाद विधानसभा की ओर से 7 फरवरी को उनका अभिमत मांगा गया और 2026 में उन्होंने अपनी सहमति व्यक्त की। अब उन्हें तय शर्तों के आधार पर सत्र में शामिल होने की अनुमति दी गई।

विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कवासी लखमा को जब भी सदन में आना या जाना होगा, इसकी जानकारी पहले से विधानसभा सचिव को देनी होगी। उनकी आवाजाही पर नजर रहेगी और पूरा कार्यक्रम औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा।

उन्हें अपने निवास क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति नहीं होगी। यानी वे सत्र के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या क्षेत्रीय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे। उनकी मौजूदगी केवल विधानसभा परिसर और सत्र की कार्यवाही तक सीमित रहेगी।

सबसे महत्वपूर्ण शर्त ‘नो स्पीच’ से जुड़ी है। उन्हें अपने ऊपर चल रहे मामले के संबंध में किसी भी प्रकार का बयान देने या चर्चा करने की अनुमति नहीं होगी। वे बजट या अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं, लेकिन अपने केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर न तो बोलेंगे और न ही टिप्पणी करेंगे।

यदि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सदन में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।

दो अहम विधेयक भी सूची में

इस सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक भी लाए जाने की सूचना है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 और छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026। इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक बहस की संभावना जताई जा रही है।

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