क्या मनोज साहू पर होगी कार्यवाही… कब होगे मनोज साहू सस्पेंड!

बताया जा रहा है कि मनोज साहू ही पूरे अमोरा पार्क को देख रहे है। बार बार फोन करने के बाद भी मनोज साहू अमोरा पार्क पर कोई आर्यवाही नहीं कर रहे है। लगातार अनदेखी के कारण से न जाने जनता के मन में कई सवाल उठ रहे है। क्या इस लापरवाही पर नगर निगम रायपुर क्या उनसे जवाब मांगेगी।
कब होगे मनोज साहू सस्पेंड
लगातार अनदेखी होने से जनता में भरी आक्रोश से जनता का कहना है कि मनोज साहू जैसे अधिकारी की वजह से बड़े लोगों पर कार्यवाही नहीं होती है। और गरीबों की दुकान अगर थोड़ी सी भी नियम विरुद्ध हो तो उसे तुरंत तोड़ा जनता है अब जनता जानना चाहती है कि कब होगी मनोज साहू जैसे अधिकारी पर करवाही। जनता बताती है कि मनोज साहू बहुत भ्रष्ट अधिकारी है और बीने पैसे लिए कोई काम नहीं करते है खैर ये तो जांच में पता चल जाएगा पर सवाल ये है कि क्या मनोज साहू जैसे अधिकारी पर कभी जांच होगी या नहीं होगी? क्या मनोज साहू के पीछे कोई बड़ी ताकत काम कर रही है।
- मनोज साहू कब होंगे सस्पेंड
- क्या मनोज साहू के कार्यों की जांच होगी
- क्या मनोज साहू amora park के मालिक मिले हुए है?
- क्या मनोज साहू के कॉल डिटेल्स खंगाले जाएंगे?
- क्या मनोज साहू लगातार amora park के मालिक से बातचित कर रहे है?
- क्या मनोज साहू ने न कार्यवाही होने का आश्वासन amora park के मालिक को दिया है?
- मनोज साहू पर कब होगी कारवाही?
जोन क्रमांक 10 ने बरती बड़ी लापरवाही
नगर पालिक निगम रायपुर में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमौरा पार्क, वीआईपी रोड और पुराना रायपुर क्षेत्र में अवैध निर्माण की शिकायत पर जोन क्रमां क-10 द्वारा कार्रवाई करते हुए चन्द्रकुमार शुक्ला को 7 दिन का नोटिस जारी किया गया था।
इस नोटिस में स्पष्ट रूप से भूमि स्वामित्व दस्तावेज, भवन निर्माण अनुज्ञा और स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत करने को कहा गया था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि—
जब 7 दिन की समय सीमा पूरी हो चुकी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या नियम सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही सीमित हैं?
या फिर प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है?
जोन कमिश्नर के निर्देश पर नोटिस जारी हुआ था, ऐसे में अब सीधा सवाल जोन कमिश्नर से बनता है—
क्या संबंधित व्यक्ति ने दस्तावेज जमा किए?
अगर नहीं, तो नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस भूमि पर अवैध निर्माण कर उसे किराए पर दिया जा रहा है, जिससे न सिर्फ नियमों की अनदेखी हो रही है बल्कि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
अब जनता जानना चाहती है—
इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है?
क्या सिर्फ नोटिस देकर मामला दबा दिया जाएगा?
या फिर अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई होगी?
अगर समय सीमा के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
हमारी मांग है— इस मामले में तत्काल जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और अवैध निर्माण पर कड़ी कार्रवाई की जाए