मास्को : भारतीय अंतरिक्ष यान से पहले चंद्रमा पर उतरने की होड़ में लगभग 47 वर्षों बाद रूस का लूना-25 मिशन एक रॉकेट के जरिए रवाना हुआ। सुदूर पूर्व में रूस के वोस्तोचन अंतरिक्षयान से चंद्रमा के लिए ‘लूना-25’ यान का प्रक्षेपण 1976 के बाद रूस का पहला प्रक्षेपण है। रूसी चंद्र लैंडर के 23 अगस्त को चंद्रमा पर पहुंचने की उम्मीद है और उसी दिन भारतीय यान के भी चंद्रमा पर पहुंचने की उम्मीद है।
चंद्रयान और लूना 25 में अंतर
रूस ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना लैंडर उतारने के लिए लूना-25 मिशन लॉन्च किया। भारत का चंद्रयान-3 इस समय चंद्रमा की कक्षा में है। 23 अगस्त को यह स्पेसक्राफ्ट चांद पर उतरेगा। इसी दिन लूना 25 भी उतरेगा। लेकिन दोनों ही मिशन में बेहद खास अंतर है। आइए जानें कि कैसे लूना 25 और चंद्रयान-3 एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।
सॉफ्ट लैंडिंग कराना है लक्ष्य
रूस ने सोवियत संघ के जमाने में अपना लैंडर चांद पर भेजा था। अभी तक सोवियत संघ, अमेरिका और चीन ही वह देश हैं जो चांद पर गए हैं। लेकिन इसके दक्षिणी ध्रुव में कोई भी देश नहीं पहुंचा है। रूस और भारत दोनों ही देश यहां पर सॉफ्ट लैंडिंग कराना चाहते हैं। लूना-25 की स्पीड ज्यादा है इसलिए वह 5.5 दिनों में ही चांद की कक्षा में पहुंच जाएगा।
कितना है वजन
रूस के सोयुज 2.1 बी रॉकेट के जरिए लूना-25 को लॉन्च किया गया है। वहीं अगर चंद्रयान-3 की बात करें तो इसकी लॉन्चिंग एलवीएम3 एम4 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया है। लूना 25 का वजन 1600 किग्रा है। वहीं चंद्रयान 3 का वजन 1752 किग्रा है, जिसमें 26 किग्रा का रोवर भी शामिल है।
क्या होगी लैंडिंग की तारीख
रूस चाहता है कि उसका अंतरिक्ष यान भारत से पहले दक्षिणी ध्रुव में सॉफ्ट लैंडिंग करे। अनुमान के मुताबिक लूना 25 चांद की सतह पर 22 अगस्त को उतरेगा। वहीं 23 अगस्त को भारत का चंद्रयान उतरेगा। हालांकि इन तारीखों में मिशन के हिसाब से बदलाव संभव है।
क्यों जा रहे दक्षिणी ध्रुव पर
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को लेकर वैज्ञानिकों में विशेष रुचि रही है, जिनका मानना है कि स्थायी रूप से छाया वाले ध्रुवीय क्रेटरों में पानी होने की संभावना है। चट्टानों में जमे पानी को भविष्य के खोजकर्ता हवा और रॉकेट ईंधन में बदल सकते हैं। एजेंसी इनपुट के साथ।