कब है सावन कालाष्टमी, जानिए तिथि और कालभैरव को प्रसन्न करने के उपाय

पंचांग के अनुसार, कालाष्टमी आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि यानी 9 जुलाई को है। कालाष्टमी पर भगवान शिव के रूप कालभैरव की पूजा की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि और राहु से मुक्ति पाने के लिए यह पूजा महत्वपूर्ण है। कई जातक रात में कालभैरव की पूजा करते हैं। इस पूजा को निशिता कहा जाता है। इस साल निशिता पूजा 8 जुलाई को रात्रि 12 बजे के बाद मध्य रात्रि में की जा सकती है। इस पूजा का समापन मुहूर्त 9 जुलाई को दोपहर 12.44 बजे तक है।
कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
कालाष्टमी के दिन 21 बेलपत्र पर चंदन से ऊँ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। शाम के शाम कालभैरवाष्टक का पाठ करना चाहिए। कालभैरव के सामने तेल का दीपक जलाएं। काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करें।
अगर कालभैरव प्रसन्न हो जाएं तो कई समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। कालभैरव शनि और राहु दशा से छुटकारा पाने में मदद करते हैं। जातक को आत्मविश्वास बढ़ता है।
कालभैरव के उपासक को बुरे आचरण से बचना चाहिए।
कालभैरव के चमत्कारी मंत्र
ऊँ कर कलित कपाल कुंडली दण्ड पाणी तरुण तिमिर व्याल। यज्ञोपवीती कर्त्तु समया सपर्या विघ्नविच्छेद हेतवे।। जयती बटुक नाथ सिद्धि साधकानाम। ऊँ श्री बम् बटुक भैरवाय नमः।।
ऊँ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
ऊँ ब्रह्म काल भैरवाय फट।
कौम भयहरणं च भैरवः ल।
ऊँ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः।