Vijaya Ekadashi : फाल्गुन में विजया एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, जानें महत्व व पूजा विधि

विजया एकादशी भारत में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह एकादशी पर्व फाल्गुन माह के 11वें दिन मनाई जाती है, जो फरवरी और मार्च के बीच आती है। यह एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जिनकी विजय और सफलता के लिए इस दिन पूजा की जाती है। “विजया” शब्द का अर्थ है जीत, और माना जाता है कि यह त्योहार उन लोगों के लिए सफलता और विजय लाता है जो इसे भक्ति के साथ मनाते हैं।

विजया एकादशी से दूर होती है बाधाएं

विजया एकादशी का व्रत यदि पूरे विधि विधान से किया जाता है तो सभी बाधाओं को दूर करने में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु ने कहा है कि जो कोई भी भक्ति के साथ विजया एकादशी का पालन करेगा, उसे अपने सभी प्रयासों में सफलता मिलेगी।

16 फरवरी को है विजया एकादशी

इस साल विजया एकादशी व्रत 16 फरवरी गुरुवार को हैं। हर साल यह एकादशी व्रत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत-उपवास के साथ ही तीर्थ जल से स्नान करने, अन्न-जल और कपड़ों का दान करने का विधान है।

विजया एकादशी पर बनेगा ये संयोग

विजया एकादशी पर इस साल यह संयोग बन रहा है कि यह व्रत गुरुवार के दिन आ रहा है। इसके बाद देवशयनी और देवउठनी एकादशी भी गुरुवार को ही रहेगी। जिससे ये दोनों दिन महापर्व हो जाएंगे। वहीं साल 2023 में ही कामिका एकादशी और रमा एकादशी भी गुरुवार को रहेगी। इस साल ऐसा संयोग कुल पांच बार बनेगा।

विजया एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

गुरुवार और एकादशी के योग में भगवान विष्णु-लक्ष्मी के साथ श्रीकृष्ण की पूजा पूजा भी करनी चाहिए।

शंख में जल और दूध मिलाकर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति पर चढ़ाते हुए अभिषेक करना चाहिए।

भगवान को पीले फूल और तुलसी पत्र चढ़ाएं। माखन-मिश्री और मिठाइयों का भोग लगाएं।

विजया एकादशी के दिन शुक्र उच्च राशि में, गुरु और शनि खुद की राशियों में रहेंगे। इस दिन महालक्ष्मी योग का प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में स्नान-दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा से शुभ फल मिलेगा।

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