अनूठी परंपरा : 50 वर्षो से गणेश पर्व में स्थापित हो रही माता की प्रतिमा

राजनांदगांव। गणेश पर्व के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित करने की परंपरा होती है, लेकिन राजनांदगांव शहर के दुर्गा चौक में भगवान गणेश नहीं बल्कि माता संतोषी की प्रतिमा स्थापित होती है। जिसके पीछे आज से लगभग 50 वर्ष पहले आई फिल्म जय संतोषी मां प्रतिमा स्थापना के लिए प्रेरणा साबित हुई।
इस फिल्म से दुर्गा चौक में होटल व्यवसाय करने वाले माता संतोषी के भक्त कार्तिक बाबा की ऐसी आस्था जागृत हुई कि उन्होंने गणेश पर्व में माता संतोषी की प्रतिमा स्थापित करने का सिलसिला शुरू कर दिया। तब से लेकर अब तक गणेश पर्व के दौरान माता संतोषी की प्रतिमा स्थापना की जा रही है।
प्रतिदिन होता है सेवा भजन
इस पूजा पंडाल में प्रतिदिन रात्रि में माता संतोषी की सेवा भजन होती है बीते कुछ वर्षों से इस पंडाल में भगवान गणेश के प्रतिमा भी स्थापित की जाती है, हालांकि यह प्रतिमा काफी छोटी होती है। पहली बार स्थापित हुई माता संतोषी के प्रतिमा शहर के प्रसिद्ध मूर्तिकार वासुदेव कालेश्वर ने बनाई थी। तब से माता की एक ही स्वरुप में प्रतिमा यहां स्थापित की जा रही है।
नारियल अर्पण करने उमड़ती थी भीड़
फिल्म की वजह से संतोषी माता के भक्तों की संख्या बढ़ चुकी थी। यहां पूजा पंडाल में माता संतोषी की प्रतिमा स्थापित होते ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया था। खासकर शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीण इस पंडाल में पहुंचकर माता को नारियल अर्पण करते थे। बताया जाता है कि तब वार्ड के लोगों ने एक साथ पहली बार इतना नारियल देखा था।
स्वर्ण जयंती महोत्सव
इस वर्ष मां संतोषी उत्सव समिति द्वारा अपनी स्थापना काल की स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। जिसमें शुक्रवार को माता के विशेष दिवस पर महाआरती, भजन संध्या, सुन्दरकाण्ड, हनुमान चालीसा पाठ,प्रसादी वितरण, 56 भोग जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। वही 6 सितंबर को हवन, उद्यान और 7 सितंबर को जस गायकों की प्रस्तुति के साथ मूर्ति विसर्जन होगा।
1976 से हो रही स्थापना
‘कानन कौशल और बेला बोस अभिनीत फिल्म जय संतोषी मां 30 मई 1975 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म की कहानी से माता संतोषी के प्रति लोगों में गहरी आस्था बन गई थी। लोग इतने प्रभावित हो गए थे कि थिएटर के परदे पर भी रुपए चढ़ाते थे। जो लोग पर्दे तक नहीं पहुंच पाते थे, वह टूर से ही सिक्के फेंकते थे। इस फिल्म के गाने राष्ट्रकवि प्रदीप ने लिखे थे। वार्ड की नागरिक 82 वर्षीया हेमलता और 75 वर्षीय प्रकाश चंद्र यादव ने इस पूजा पंडाल के इतिहास को लेकर बताया कि शहर के श्रीकृष्ण टॉकीज में प्रदर्शित हुई इस फिल्म के बाद वर्ष 1976 में कार्तिक बाबा ने यहां गणेश पर्व में माता संतोषी के प्रतिमा स्थापित की। वहीं उनके बाद कुछ वर्षों तक यहां रिक्शा स्टैंड में खड़े होने वाले रिक्शा चालकों ने प्रतिमा स्थापित किया और फिर इसके बाद से अब मोहल्ले के लोग माता संतोषी की प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं।