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CG सरकारी खर्च पर दौरा : एजूकेशनल टूर में मौज-मस्ती के सवाल पर बिफरे मेयर, कहा- पार्षद के सीने में दिल नहीं है क्या

Chhattisgarh August 15, 2024 रिपोर्टर: shailesh
CG सरकारी खर्च पर दौरा : एजूकेशनल टूर में मौज-मस्ती के सवाल पर बिफरे मेयर, कहा- पार्षद के सीने में दिल नहीं है क्या

CG सरकारी खर्च पर दौरा : एजूकेशनल टूर में मौज-मस्ती के सवाल पर बिफरे मेयर, कहा- पार्षद के सीने में दिल नहीं है क्या

रायपुर। महापौर एजाज ढेबर को एजूकेशनल टूर में पार्षदों की मौज-मस्ती का सवाल रास नहीं आया। सवाल सुनते ही वे बिफर उठे और कहने लगे पार्षद के सीने में दिल नहीं है क्या ? सुबह से उठकर क्या नाली साफ करने लगेगा। नाराजगी के ये भाव माना एयरपोर्ट पर टूर वापसी के दौरान पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल पर देखने को मिली।

दरअसल सरकारी खर्च पर रायपुर नगर निगम के महापौर सहित भाजपा-कांग्रेस के 50 पार्षद और निगम के 15 अधिकारी सहित 65 लोग बेंगलुरु मैसूर, ऊटी के शैक्षणिक भ्रमण पर बाहर गये थे। इस दौरान दूर से डांस-पहाड़ों पर रील बनाने के वीडियो सामने आए। वीडियो वायरल होने पर शहर में चर्चा रही।

महापौर ने पार्षदों की मौज-मस्ती को लेकर कहा- कम उम्र के युवा पार्षद हैं। स्वाभाविक है, जब सेशन का बाद वक्त रहता है या छुट्टी रहती है, उस दिन आदमी कुछ ना कुछ तो करेगा ना। अब कोई ये बोल दे कि नहीं पढ़ाई करने गए हो, तो पढ़ाई करके चुपचाप वापस आ जाओ, यह ठीक नहीं है। जो यहां रुक गए और नेतागिरी कर रहे हैं, उनकी भी टिकट बना था, दिखा दूंगा। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता।

काफी कुछ सीखने को मिला, रायपुर में करेंगे लागू

महापौर एजाज देबर ने कहा कि स्टडी दूर के दौरान हमें काफी कुछ सीखने को मिला। इससे नई जानकारी मिली है, जो हम वहां काम देखकर आये हैं, उसे राजधानी में लागू करने का प्रयास करेंगे। हमारे साथ सीनियर पार्षद भी गये थे। बेंगलुरु और मैसूर जैसे शहरों का भ्रमण कर हम लोगों ने वहां जो समझा है. जो बात सीखकर आये हैं, उसे 15 अगस्त के बाद साझा करेंगे।

इंदौर टूर गये, लागू क्या किया?

पिछली बार टूर में इंदौर गये पर वहां से लौटकर लागू क्या किया? महापौर ने कहा, हम इंदौर गये थे तो वहां हमने देखा कि एसटीपी से वे लोग बैकवॉश वाटर बेचते हैं। हमने राजधानी में इसे लागू किया। कारा, निमोरा, चंदनीडीह में नगर निगम ने गंदे पानी को साफ करने एसटीपी लगवाये हैं। उस एसटीपी से उपचारित पानी बिक रहा है। उससे नगर निगम को एक निश्चित राशि मिलने लगी है। इसीलिए यह कहना ठीक नहीं कि पिछले टूर में जो सीखकर आये, उसे लागू नहीं किया।

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