अबूझ मुहूर्त पर बन रहे हैं ये योग, अक्षय तृतीया पर जानिए क्या खरीदना होगा फलदायी?

रायपुर : वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है. अक्षय का अर्थ है, जिसका कभी क्षय ना हो, जो स्थायी रहे. इस दिन किया गया दान, पूजन, हवन सहित हर पुण्य कार्य अक्षय फल देता है. कोई भी शुभ कार्य और नई शुरुआत के लिए इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है|
हिंदू कैलेंडर में सबसे शुभ दिनों में से एक है. इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह इतना शुभ समय है कि कोई भी महत्वपूर्ण कार्य पारंपरिक पंचांग देखे बिना किया जा सकता है. इस दिन विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय और अन्य गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं. इस दिन शुरू किए गए कार्य सफलता और सौभाग्य दिलाते हैं. अक्षय तृतीया तिथि पर त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी, इसलिए इसे युगादितिथि भी कहते हैं.
पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व
अक्षय तृतीया सत युग और त्रेता युग की शुरुआत का प्रतीक है, और द्वापर युग के अंत का भी प्रतीक है, इसलिए इसे युगादि तिथि या नए युग की शुरुआत कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के तीन अवतार अवतरित हुए थे और पवित्र नदी गंगा धरती पर उतरी थी. इसके अलावा, इस पवित्र तिथि से चार धाम यात्रा शुरू होती है, जो इसका धार्मिक महत्व बढ़ाती है. ब्रह्मांड पुराण के अनुसार उत्तर दिशा से खरीदा गया सोना शुभ फल देता है. इससे आत्मविश्वास और सकारात्मकता में वृद्धि होती रहती है. ऐसी स्थिति में की गई नई शुरुआत समृद्धि देने वाली होती है.
अक्षय तृतीया 2025 तिथि और समय
क्षय तृतीया के दिन 17 साल बाद बुधवार दिन और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन परिजात, गजकेसरी, केदार, हर्ष, काहल, उभयचरी समेत 10 महायोग भी बन रहे हैं. ऐसे उत्तम संयोग में खरीदारी, निवेश, लेन-देन और नई शुरुआत में लाभ मिलेगा. इस साल अक्षय तृतीया 29 अप्रैल को शाम 5:32 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल को दोपहर 2:13 बजे तक रहेगी. उदया तिथि (सूर्योदय आधारित गणना) के अनुसार, अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जाएगी.
इस दिन पूजा करने का सबसे शुभ समय सुबह 6:07 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा. सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय लाभ चौघड़िया के दौरान 30 अप्रैल को शाम 5:15 बजे से 6:15 बजे के बीच है.
अक्षय तृतीया 2025 पर शुभ योग
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण योग बनेंगे, जैसे-
शोभन योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
गजकेसरी योग
रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग
ऐसा माना जाता है कि ये खगोलीय संयोग धन, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद लाते हैं. इसलिए अक्षय तृतीय का पर्व लंबी अवधि की चीजों, नए काम शुरू करने और जमीन-जायदाद के अलावा ज्वेलरी, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीददारी के लिए शुभ माना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन श्रीहरि विष्णु, माता लक्ष्मी और गौरी की पूजा होगी. इस दिन भगवान नारायण और लक्ष्मी माता को कमल पुष्प, श्वेत फूल, कमलगट्टा, इत्र, अभ्रक, खीर का भोग, घी का दीपक आदि से पूजा के बाद श्रीसूक्त, कनकधारा का पाठ करने से अक्षय पुण्य लाभ व वैभव, ऐश्वर्य की कामना जल्द पूर्ण होती है. इस दिन को दान-पुण्य का महापर्व कहा जाता है.
अक्षय तृतीया पर क्या खरीदें
आम तौर पर इस दिन सोने के आभूषण या सोना खरीदना चाहिए. यदि सोना खरीदना संभव न हो तो कई वैकल्पिक वस्तुएं हैं जिन्हें इस दिन घर लाना अत्यधिक शुभ माना जाता है. जैसे-
मिट्टी के बर्तन, पीतल की वस्तुएं, या पीली सरसों के बीज: ये वस्तुएं समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं.
11 कौड़ियां: इनकी पूजा करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन की प्राप्ति होती है.
दक्षिणावर्ती शंख: इसे लक्ष्मी का दिव्य भाई माना जाता है, इसे घर में लाकर इसकी पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है.
एकाक्षी नारियल: देवी लक्ष्मी का प्रतीक; कहा जाता है कि यह आर्थिक कठिनाइयों से रक्षा करता है.
पारद शिवलिंग: इसे अभिमंत्रित कर पूजन करने से घर में भगवान शिव, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की उपस्थिति सुनिश्चित होती है.
क्रिस्टल या स्फटिक कछुआ: इससे अच्छा स्वास्थ्य रहता है और यह परिवार को बीमारी से बचाता है.
अक्षय तृतीया पर क्या न खरीदें?
एल्युमीनियम, स्टील या प्लास्टिक से बने बर्तन या वस्तुएं न खरीदें.
कांटेदार पौधे खरीदने से बचें.
काले कपड़े खरीदने से बचें.
जुआ या लॉटरी में भाग न लें