धन-दौलत में होगी अपार वृद्धि, इस अक्षय तृतीया पर करें ये खास उपाय

अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम ने जन्म लिया था। अक्षय तृतीया का दिन कई मायनों में बेहद खास होता है। इसी दिन से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है।
ऋषि वेदव्यास और गणेश जी द्वारा आज ही के दिन महाभारत ग्रंथ की रचना की गई थी। मां गंगा का इसी तिथि पर धरती पर आगमन हुआ था। इसके अलावा अक्षय तृतीया 2023 के खास अवसर पर ही श्री कृष्ण के परम मित्र सुदामा उनसे मिलने आए थे। इसके साथ ही इस दिन त्रेता युग का प्रारंभ भी माना जाता है।
अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है जो पूरे साल में केवल तीन होते हैं। अबूझ मुहूर्त, वे मुहूर्त होते हैं जब किसी भी शुभ या बड़े कार्य के लिए पंडित से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती। इस दिन किया हुआ कोई भी कार्य अपने साथ सफलता और समृद्धि लेकर आता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन सोना या चांदी खरीदना और दान पुण्य करना बहुत खास माना जाता है।
जो लोग अक्षय तृतीया के दिन सोने या चांदी के आभूषणों में निवेश करते हैं, उनके जीवन में धन की कमी नहीं रहती। आपकी धन संपत्ति कभी नष्ट ना हो, इसके लिए अक्षय तृतीया के दिन कुछ उपाय करना बहुत लाभदायक होता है। आईये जानते हैं कौन से हैं ये उपाय –
धनप्राप्ति के लिए करें ये खास उपाय
अक्षय तृतीया के दिन अपने घर को साफ-सुथरा रखें और मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की एक साथ पूजा करें। यह बेहद शुभ फल लेकर आता है।
अपने घर या ऑफिस में मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की प्रतिमा को भी स्थापित करें। यह आर्थिक समस्याओं का समाधान करने में सहायक होते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन सोने या चांदी की वस्तुएं खरीदें। इससे धन-संपत्ति में कमी नहीं आती और घर-परिवार की समृद्धि बढ़ती रहती है।
पूजा के स्थान पर माता लक्ष्मी की चरण पादुकाएं रखें। माता लक्ष्मी का वास हर किसी के घर को सुख और समृद्धि से भर देता है।
वैवाहिक जीवन में संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा जरूर करें।
इस दिन 11 कौड़ियों को एक कपड़े में बांध कर पूजा वाले स्थान पर रखें। इससे माता लक्ष्मी का वास बना रहता है।
इस दिन दान-पुण्य जरूर करें। खास तौर पर पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ खास वस्तुओं जैसे सत्तू, खड़ाऊं या छाते का दान करें।