रायपुर : इस समय देश में कई बड़े एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, इन्हीं में से एक है रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर. 465 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे इलाकों से होकर ओडिशा के नवरंगपुर और कोरापुट तक जाएगा. इसके बाद यह कॉरिडोर आंध्र प्रदेश होते हुए विशाखापट्टनम पोर्ट से जुड़ेगा. इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद 12 से 14 घंटे में पूरा होने वाला सफर मात्र 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.
एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खास बात
इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खास बात यह है कि ये केवल 6 लाइन का हाईस्पीड रोड नहीं है, बल्कि मध्य भारत को समुद्री किनारों पर बसे शहरों से जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे होने वाला है. रायपुर से विशाखापट्टनम तक सीधा 6 लेन का रास्ता मिलने से कारोबार और माल ढुलाई को बड़ा फायदा हो सकता है.
दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य
करीब ₹16,482 करोड़ से ₹20,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत 19 से ज्यादा पैकेज में किया जा रहा है. इसका बड़ा हिस्सा निर्माण के अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ चुका है. करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. वर्तमान में आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में फिनिशिंग का काम किया जा रहा है. दिसंबर 2026 तक पूरा कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
सफर का समय हो जाएगा आधा
बता दें कि अभी तक रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच करीब 597 किमी का लंबा रास्ता है. अभी इस दूरी को तय करने में 12 से 14 घंटे लगते हैं, लेकिन जब ये कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा तो यह समय घटकर 5 से 6 घंटे रह जाने की उम्मीद हैं. इस कॉरिडोर की एक और खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा उन इलाकों से गुजर रहा है जिन्हें लंबे समय तक पिछड़ा और दुर्गम माना जाता था. इसमें कोंडागांव और कांकेर के बीच बनने वाली करीब 2.83 किलोमीटर लंबी 6 लेन ट्विन टनल है.
आगरा, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों को जोड़ेगा
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रायपुर केवल विशाखापट्टनम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह नेशनल हाईवे नेटवर्क के जरिए सीधे तौर पर देश के उत्तर और मध्य हिस्से के बड़े महानगरों को भी जोड़ रहा है. इनमें NH-30, NH-34, NH-539, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे, ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़कर रायपुर और विशाखापट्टनम सीधे दिल्ली, आगरा, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों सेजुड़ जाएंगे.