कभी बेची मूंगफली तो कभी चिपकाए फिल्मों के पोस्टर, तीन बत्ती चॉल से निकल ऐसे स्टार बने जैकी श्रॉफ

मुंबई : जैकी श्रॉफ आज जिस मुकाम पर काबिज हैं, उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता कि वह कभी मुंबई की तीन बत्ती चॉल में एक छोटे से कमरे में रहे होंगे। कोई नहीं कहेगा कि वहां उस चॉल में जग्गू दादा यानी जैकी श्रॉफ ने अपनी जिंदगी के 30 साल गुजारे। जैकी श्रॉफ का परिवार कभी घोर आर्थिक तंगी में रहा, लेकिन आज एक्टर करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। यही नहीं, उन्होंने बेटे टाइगर श्रॉफ को भी फिल्मों में स्टार बना दिया है।

आज जैकी श्रॉफ भले ही बॉलीवुड के बड़े स्टार्स में शुमार किए जाते हों, लेकिन वह अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। वह उस चॉल और 10×10 के उस कमरे को कभी नहीं भूले, जहां मां के साथ बचपन की सैंकड़ों यादें बनाईं। जैकी श्रॉफ कभी थिएटर के बाहर मूंगफली बेचते थे। कभी फिल्मों के पोस्टर भी चिपकाते थे। कौन जानता था कि एक दिन वही ऐसे स्टार बनेंगे, जिनकी फिल्में थिएटर में दौड़ेंगी और नोटों की बरसात होगी।

तीन बत्ती के चॉल से निकला लड़का कैसे बॉलीवुड का स्टार बना, इसकी कहानी बहुत ही इंस्पायरिंग है। उन सभी लोगों के लिए मिसाल है, जो सोचते हैं कि किस्मत सिर्फ भगवान बदल सकता है, मेहनत नहीं। ‘मंडे मोटिवेशन’ सीरीज में जानिए Jackie Shroff ने कैसे अपने दम पर किस्मत बदली और एक नई इबारत लिख डाली।

जैकी श्रॉफ के पापा, कजाकिस्तान से जान बचाकर भागी थीं मां

जैकी श्रॉफ के पिता का नाम काकूभाई श्रॉफ था, जोकि एक ज्योतिषी भी थे। वहीं मां रीटा कजाकिस्तान की रहने वाली थीं। बताया जाता है कि जैकी श्रॉफ की मां कई साल पहले तब कजाकिस्तान से भागकर लाहौर आ गई थीं, जब वहां तख्तापलट हुआ। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बीच वह मुंबई आ गईं। यहां आने के बाद उनकी मुलाकात तीन बत्ती चॉल में रहने वाले काकूभाई श्रॉफ से हुई। काकू भाई पहले लग्जरी लाइफ जीते थे। वह खूब रईस थे, काफी रुपया-पैसा और रुतबा था। काकूभाई श्रॉफ ज्योतिष होने के साथ-साथ स्टॉक मार्केट के नामी शेयर होल्डर भी थे। इसी में एक बार उनकी सारी पूंजी डूब गई, और परिवार रास्ते पर आ गया।

मूंगफली बेचीं, फिल्मों के पोस्टर चिपकाकर गुजारा

तब काकूभाई श्रॉफ को तीन बत्ती चॉल में रहना पड़ा। यहां रीटा से मुलाकात हुई और फिर कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद काकू भाई और रीटा ने दो बेटों को जन्म दिया, जिनमें से छोटे बेटे का नाम जैकी श्रॉफ रखा। जैकी श्रॉफ ने तीन बत्ती चॉल में कई दशक गुजारे। परिवार की मदद के लिए वह कभी मूंगफली बेचते तो कभी कोई फिल्म रिलीज होने पर थिएटर के बाहर उसके पोस्टर चिपकाते। इस काम से उन्हें जो पैसे मिलते, उससे घर चलाने में मदद मिलती। पैसों कि किल्लत कितनी ज्यादा थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैकी श्रॉफ को 10वीं क्लास कराने के लिए मां को साड़ी और बर्तन बेचने पड़े थे। जैसे-तैसे जैकी श्रॉफ ने 11वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली। लेकिन जब कॉलेज जाने के लिए पैसों की भारी तंगी हुई तो एक्टर ने आगे पढ़ाई से इनकार कर दिया।

नौकरी छोड़ बन गए मॉडल, देव आनंद ने दी पहली फिल्म

जैकी श्रॉफ ने ट्रैवल एजेंसी की नौकरी छोड़कर मॉडलिंग शुरू कर दी। अच्छी कमाई हो रही थी। इसी बीच उनकी दोस्ती देव आनंद के बेटे सुनील आनंद से हुई। उन्होंने उन्हें देव आनंद से मिलवाया। देव आनंद, जैकी श्रॉफ से मिलकर बहुत प्रभावित हुए और अपनी फिल्म में एक सपोर्टिंग किरदार दिया। और इस तरह जैकी श्रॉफ फिल्मों में आ गए।

सुभाष घई ने बनाया ‘हीरो’

जैकी श्रॉफ को फिर सुभाष घई ने फिल्म ‘हीरो’ में लीड रोल में लिया। फिल्म सुपरहिट रही, और इसने जैकी श्रॉफ को रातोंरात स्टार बना दिया। उसके बाद से जैकी श्रॉफ ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने चार दशक से भी लंबे करियर में जैकी श्रॉफ ने 13 भाषाओं में 220 से भी ज्यादा फिल्में की हैं। उन्होंने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स समेत कई सम्मान जीते, और अब भी फिल्मों में सक्रिय हैं।

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