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साहब! बीयर ठंडी नहीं मिलती, चेहरा देखकर देते शराब, सरकार तक पहुंची मदिराप्रेमियों की शिकायत, पढ़ें पत्र 

Chhattisgarh May 22, 2026 रिपोर्टर: shailesh
साहब! बीयर ठंडी नहीं मिलती, चेहरा देखकर देते शराब, सरकार तक पहुंची मदिराप्रेमियों की शिकायत, पढ़ें पत्र 

साहब! बीयर ठंडी नहीं मिलती, चेहरा देखकर देते शराब, सरकार तक पहुंची मदिराप्रेमियों की शिकायत, पढ़ें पत्र 

रायपुर/जशपुर : छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन तिहार’ में जहां लोग अमूमन सड़क, बिजली और पानी की समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं, वहीं जशपुर के बगीचा में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जिसने अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया. यहां शराब प्रेमियों ने आबकारी विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि सरकारी दुकान में ग्राहकों का ‘चेहरा देखकर’ शराब दी जा रही है और ठंडी बियर के नाम पर जेब काटी जा रही है.

दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार जनता की समस्याओं को मौके पर ही निपटाने के लिए ‘सुशासन तिहार’ (गुड गवर्नेंस फेस्टिवल) मना रही है. श‍िव‍िर में शराब प्रेमियों ने प्रशासन को सौंपे अपने लिखित आवेदन में गंभीर और दिलचस्प आरोप लगाए हैं. उनका पहला और सबसे बड़ा दर्द यह है कि बगीचा की शराब दुकान में हमेशा अच्छी क्वालिटी की शराब नदारद रहती है. हद तो तब हो जाती है जब काउंटर पर तैनात कर्मचारी ‘चेहरा देखकर’ (VVIP ट्रीटमेंट देते हुए) पसंदीदा ब्रांड का वितरण करते हैं. आम ग्राहकों को सिर्फ आश्वासन और घटिया ब्रांड थमा दिए जाते हैं.

ठंडी बियर के लिए ‘एक्स्ट्रा’ वसूली

शिकायत में ‘चिल्ड बियर’ के शौकीनों का दर्द भी छलक उठा. आबकारी विभाग को सौंपे आवेदन के अनुसार, सरकारी दुकान में कभी भी सामान्य कीमत पर ठंडी बियर नहीं मिलती. अगर किसी को भीषण गर्मी में ठंडी बियर चाहिए, तो सेल्समैन उससे तय कीमत से ज्यादा पैसे (ओवररेटिंग) वसूलते हैं. ज्यादा पैसे देने पर ही फ्रिज से ठंडी बोतल बाहर निकाली जाती है, वरना गर्म बियर से ही संतोष करना पड़ता है.

क्या होता है सुशासन तिहार?

यह छत्तीसगढ़ सरकार का एक विशेष जन-संवाद अभियान है, जिसका उद्देश्य जनता की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना और पारदर्शी शासन देना है. 13 मई को जशपुर ज‍िले बगीचा नगर पंचायत के वार्ड आठ में अभ‍ियान के तहत श‍िविर लगाया गया था, ज‍िसमें शराब प्रेमियों की इस ‘उचित व्यवस्था’ संबंधी मांग और अनोखा शिकायती पत्र सामने आया.

हालांकि, मामले की गंभीरता और नियमों के उल्लंघन (ओवररेटिंग) को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और आबकारी व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया है. अब देखना होगा कि बगीचा के शराब प्रेमियों को उनका ‘हक’ कब तक मिलता है!

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