मई महीने में 13 दिन गूंजेगी शहनाई, यहां देखें विवाह के मुहूर्त की पूरी लिस्ट

सनातन धर्म में विवाह को एक मांगलिक कार्य माना जाता है। इस शुभ कार्य को करने के लिए शुभ मुहूर्त बहुत महत्व रखता है। खरमास की वजह से बंद हुई शहनाई एक बार फिर गूंजने के लिए तैयार हैं। ऐसा माना जाता है कि अशुभ मुहूर्त में किए गए विवाह का अक्सर जोड़े पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शादी विवाह को शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है । यह परंपरा हमारे हिन्दू रीति रिवाज में बहुत ही शुभ माना गया है। विवाह से पहले वर वधु की कुंडलियों को देखा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल में कुल 4 अबूझ मुहूर्त होते हैं। इनमें आखा तीज, देवउठनी एकादशी, बसंत पंचमी और भड़ली नवमी। यानी इन चार मौकों पर मुहूर्त न होते हुए भी विवाह किए जा सकते हैं। बता दें कि मई महीने में कुल 13 दिन विवाह के शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। आइये जानते हैं मई माह में विवाह की तारीखें।
मई महीने में विवाह का शुभ मुहूर्त
6 मई 2023 (शनिवार), मुहूर्त- रात 09:13 बजे से सुबह 05:36 बजे तक, 7 मई 2023
8 मई 2023 (सोमवार), मुहूर्त- रात 12:49 बजे से सुबह 05:35 बजे तक, 9 मई 2023
9 मई 2023 (मंगलवार), मुहूर्त- सुबह 05:35 बजे से शाम 05:45 बजे तक, नक्षत्र- मुला
10 मई 2023 (बुधवार), मुहूर्त- शाम 04:12 बजे से सुबह 05:33 बजे तक, 11 मई 2023
11 मई 2023 (गुरुवार), मुहूर्त- सुबह 05:33 बजे से सुबह 11:27 बजे तक
15 मई 2023 (सोमवार), मुहूर्त- सुबह 01:30 बजे से सुबह 05:30 बजे तक, 16 मई 2023
16 मई 2023 (मंगलवार), मुहूर्त- सुबह 05:30 बजे से रात 01:48 बजे तक, 17 मई 2023
20 मई 2023 (शनिवार), मुहूर्त- शाम 05:18 बजे से सुबह 05:27 बजे तक, 21 मई 2023
21 मई 2023 (रविवार), मुहूर्त- सुबह 05:27 बजे से सुबह 05:27 बजे तक, 22 मई 2023
22 मई 2023 (सोमवार), मुहूर्त- सुबह 05:27 बजे से सुबह 10:37 बजे तक
27 मई 2023 (शनिवार), मुहूर्त- रात 08:51 बजे से रात 11:43 बजे तक
29 मई 2023 (सोमवार), मुहूर्त- रात 09:01 बजे से सुबह 05:24 बजे तक, 30 मई 2023
30 मई 2023 (मंगलवार), मुहूर्त- सुबह 05:24 बजे से रात 08:55 बजे तक
बता दें कि जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में विवाह कार्य वर्जित रहेंगे। इसका कारण यह है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। यही कारण है कि सभी शुभ व मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। भगवान विष्णु दिवाली के बाद देवउठनी एकादशी के दिन योग निद्रा का त्याग करते हैं। जिसके बाद फिर से विवाह के शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इस दिन पहला विवाह तुलसी और शालिग्राम जी का होता है।