हथेली में बना है ऐसा चिन्ह तो शनि साढ़े साती का नहीं होगा असर

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि हाथों की रेखाओं में जातक का भूत, वर्तमान और भविष्य होता है। ऐसी ही महत्वपूर्ण रेखाएं हैं मंगल रेखा और भाग्य रेखा। मंगल रेखा जीवन रेखा के समानांतर होती है। वहीं, मंगल रेखा का भाग्य रेखा से संयोग बहुत ही शुभ माना गया है। मंगल ग्रह का संबंध श्री राम भक्त हनुमान से होता है। हनुमान जी को मंगल ग्रह के इष्ट देव का रूप माना जाता है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के हाथ में मंगल का चिन्ह यानी हनुमान जी का चिन्ह है तो शनि की साढ़े साती उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। आइए जानते हैं हाथ में मंगल रेखा किस प्रकार का फल देती है।

जानिए मंगल रेखा से जुड़ी बातें

1.हस्तरेखा शास्त्र के हथेली में मंगल रेखा होना बेहद शुभ माना गया है। यदि मंगल रेखा से कोई रेखा निकलकर भाग्य रेखा से मिल जाए तो जातक जीवन में अपार धन कमाता था। उसके भाग्य में पैतृक संपत्ति होती है।

2.यदि किसी जातक के हथेली में कई मंगल रेखाएं जीवन रेखा के साथ होती हैं तो पहली बड़ी, दूसरी छोटी, तीसरी उससे छोटी होती है तो उसे हनुमान रेखा या मंगल रेखा कहा जाता है।

3.मंगल रेखा से निकली कोई रेखा भाग्य रेखा से मिल जाए तो ऐसा जीवन में जमीन, जायदाद का मालिक होता है।

4.ऐसे जातक जिनके हाथ में मंगल रेखा से निकलकर शनि पर्वत तक कोई रेखा होती है, ऐसा व्यक्ति भाग्यवान होता है।

5.मंगल रेखा से निकली हुई रेखा भाग्य रेखा को पार कर आगे बढ़े तो ऐसी स्थिति नुकसानदायक होती है।

6.मंगल ग्रह उठा हुआ हो तो जातक के हाथ में हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

7.जीवन रेखा के साथ-साथ मंगल रेखा स्वच्छ हो, राहु रेखा उसे काटती हो और मंगल पर्वत पर शंख का चिह्न हो तो ऐसे व्यक्ति पर हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है।

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