नौ साल की उम्र में कटा दाया हाथ : ऐसा हौसला कि 5 सालो में जीत लिए 23 मैडल

बिलासपुर। 9 साल की उम्र में एक सड़क घटना के बाद दायां हाथ काटना पड़ा। इसके बाद तो लगा जैसे की जिंदगी थम गई और अब कुछ बचा ही नहीं है। हौसला लेकिन बोल रहा था कि अभी तो कुछ कर गुजरने की बारी है। इसी जिद, जुनून और हौसले ने व्हीलचेयर तलवारबाजी की खिलाड़ी स्वाति साहू को पिछले 5 सालों में 23 नेशनल मैडल पदक जीतने में मदद की। यही नहीं अभाव से लड़कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुकाम बनाने वाली स्वाति साहू को मुख्यमंत्री खेल अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है और अब इस साल के राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले शहीद विनोद चौबे खेल सम्मान के लिए भी इस खिलाड़ी का नाम नामांकित हुआ है।
बहतराई निवासी स्वाति साहू एक मजदूर मां-बाप की बेटी है। पढ़ाई और खेल के क्षेत्र में अपना नाम कमाने के सपने स्वाति ने पाल रखे थे। बहतराई स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल में वह नियमित पढ़ाई भी कर रही थी। अक्टूबर 2016 में जब वह कक्षा चौथी में थी और स्कूल जाने के लिए अपने साइकिल से घर से निकली थी, इसी दौरान एक हाईवा ने पीछे से टक्कर मार दी। इसमें गंभीर रूप से घायल स्वाति को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने यह कह दिया की जान बचाना है तो दायां हाथ काटना पड़ेगा।मजबूर और मजदूर मां बाप के सामने और कोई चारा नहीं था तो डॉक्टरों की बात मान ली गई। स्वाति ठीक तो हो गई लेकिन उसे अब सारा जीवन एक हाथ के सहारे ही काटना था। शुरुआत में स्कूल जाना बंद हो गया। खेलकूद से जाता टूट गया तो दोस्त यारों ने भी आना-जाना काम कर दिया।
हैदराबाद के साई एकेडमी के लिए चयनित
स्वाति ने लेकिन हार नहीं मानी। माता सरस्वती साहू और पिता रामखिलावन साहू ने हिम्मत दिया तो स्वाति ने भी कुछ कर गुजरने की ठान ली। सबसे पहले उसने ताइकांडो और कराते खेलना शुरू किया। दोनों खेलों में स्वाति ने निशक््त नहीं बल्कि सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों के साथ प्रतियोगिता की और कई मैच जीते। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी पदक प्राप्त किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात विकलांग तलवारबाजी संघ के सचिव डीआर साहू से हुई। उन्होंने स्वाति को व्हीलचेयर फेंसिंग खेलने कहा। स्वाति ने इसके बाद 2020 से व्हीलचेयर फेंसिंग खेलना शुरू किया। शुरुआत में कुछ तकलीफ जरूर आई लेकिन अब लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहीं हैं। स्वाति फिलहाल अपने खेल के दम पर हैदराबाद के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में ट्रेनिंग ले रही है। स्वाति का सपना देश के लिए तलवारबाजी में पदक जीतना है।
कर्ज और लोन लेकर कराया इलाज
अक्टूबर 2016 में जब स्वाति का एक्सीडेंट हुआ और हाथ काटना पड़ा, उस दौरान उसके इलाज में लगभग 5 लाख का खर्चा आया था। गरीब मां-बाप के लिए इतना पैसा एक साथ जमा करना काफी मुश्किल था। बेटी का जीवन बचाने के लिए लेकिन अभिभवाकों ने पड़ोसियों और पहचान के लोगों से कर्जा लिया। इसके साथ ही एक निजी बैंक से लोन भी लिया गया। कुछ खिलाड़ियों ने भी सहयोग किया और करीब 2 महीने के इलाज के बाद स्वाति सकुशल घर लौट सकी।
स्कूल ने नहीं दिया साथ प्राइवेट परीक्षा देगी
सबसे विडंबना वाली बात यह रही कि स्वाति ने अपने खेल के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया लेकिन बेहतराई शासकीय स्कूल ने उसका साथ नहीं निभाया। दर असल लगातार खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के कारण स्वाति नियमित कक्षाएं अटेंड नहीं कर पा रही थी तो स्कूल ने उसे टीसी थमा कर निकाल दिया। स्कूल का कहना था कि नियमित के तौर पर पढ़ाई करने के लिए 80% से क्लास में अधिक उपस्थिति जरूरी है। फिलहाल स्वाति 12वीं में है और इस साल प्राइवेट के तौर पर कला संकाय में परीक्षा देगी।