आरबीआई ने बैंकों से पूछा, अडाणी ग्रुप को कितना कर्ज दिया “संसद में हंगामा”
विपक्ष ने कहा, संसद या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी जांच करे

नई दिल्ली : आरबीआई ने सभी बैंकों से अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) को दिए कर्ज की जानकारी मांगी है। यह खबर देने वाली न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि आरबीआई के अफसरों ने इस पर कमेंट्स करने से इनकार कर दिया। हालांकि, बिना नाम बताए उन्होंने यह जानकारी दी। उधर, विपक्ष ने संसदीय पैनल (जेपीसी) या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से जांच कराने की मांग की।
फुली सबस्क्राइब्ड ऍफ़पीओ के रद्द होने के बाद ग्रुप के शेयर्स में गुरुवार को 10% तक गिरावट देखी जा रही है। लोकसभा और राज्यसभा में इस मामले की जांच की मांग को लेकर हंगामा हुआ। इससे दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। बता दें कि बुधवार देर रात अडाणी ग्रुप ने 20 हजार करोड़ रुपए के फुली सबस्क्राइब्ड ऍफ़पीओ को रद्द कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि इन्वेस्टर्स का पैसा वापस किया जाएगा। इससे पहले बुधवार को अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2179.75 पर बंद हुआ था। यही वजह थी कि अडाणी ग्रुप ने ऍफ़पीओ वापस लेने का फैसला लिया।
गौतम अडाणी ने ऍफ़पीओ रद्द करने के बाद एक वीडियो मैसेज दिया। इसमें इन्वेस्टर्स का शुक्रिया अदा किया। कहा, ‘पिछले हफ्ते स्टॉक में हुए उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी के बिजनेस और उसके मैनेजमेंट में आपका भरोसा हमारे लिए आश्वासन देने वाला है। मेरे लिए मेरे निवेशकों का हित सर्वोपरि है। बाकी सब कुछ सेकेंडरी है। इसलिए निवेशकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए हमने ऍफ़पीओ वापस ले लिया है। बोर्ड ने महसूस किया कि ऍफ़पीओ के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।’
13 विपक्षी पार्टियों ने कहा, हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संसद में चर्चा हो
अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को लेकर कांग्रेस, टीएम्सी, आम आदमी पार्टी, सपा, डीएम्के, जनता दल और लेफ्ट समेत 13 विपक्षी पार्टियों ने मीटिंग की। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चेंबर में हुई। इनमें से 9 पार्टियों ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास बैंक और एलआई से उठ जाएगा। कुछ कंपनियों के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। सभी पार्टियों के नेताओं ने मिलकर एक फैसला लिया है कि आर्थिक दृष्टि से देश में जो घटनाएं हो रही हैं उसे सदन में उठाना है, इसलिए हमने एक नोटिस दिया था। हम इस नोटिस पर चर्चा चाहते थे, लेकिन जब भी हम नोटिस देते हैं तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।