‘प्लीज, हमें इस नरक से निकाल लो’, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के कर्मचारियों ने लगाई गुहार

संयुक्त राष्ट्र : गाजा पट्टी में इस्राइल का जवाबी हमला लगातार जारी है। ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के साथ फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाले कर्मचारी बेहद डरे हुए हैं। उन्होंने गाजा पट्टी में मौजूदा हालातों को नरक से भी बेकार बताया है। उन्होंने बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा बुजुर्गों के लिए खाना, पानी और दवाओं की तत्काल आपूर्ति करने की अपील की है।
फलस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) गाजा पट्टी में काम करने वाली सबसे बड़ी संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है। यहां 13 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, वेयरहाउस कर्मचारी, तकनीशियन और ड्राइवर शामिल हैं।
यूएनआरडब्ल्यूए ने गाजा में फलस्तीनी शरणार्थियों को लेकर आपात अपील जारी की। कहा कि गाजा में हो रहे हमले का खामियाजा लाखों फलस्तीनी शरणार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
यूएनआरडब्ल्यूए की संचार निदेशक जूलियट टौमा ने गाजा में मानवीय स्थिति पर पत्रकारों से कहा कि गाजा में संयुक्त राष्ट्र के हजारों कर्मचारी है। वो लोग डरे हुए हैं। वे चाहते हैं कि संघर्ष समाप्त हो जाए। टौमा ने आगे कहा, ‘कर्मचारी कह रहे हैं कि वहां नरक जैसे हालात हैं। उन्हें जल्द वहां से बाहर निकाला जाए।’
टौमा ने कहा कि हफ्तेभर से इस्राइल की घेराबंदी और बमबारी के बीच मिल रहे एसओएस मैसेज दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। इन मैसेजों को देखकर दिमाग खराब हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि निराशा बढ़ती जा रही है। हालात समय के साथ और खराब हो रहे हैं। यही हमारे कर्मचारी बता रहे हैं।’
बता दें, सात अक्तूबर को फलस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इस्राइली सीमा में घुसकर 1400 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। वहीं इस्राइल के जवाबी हमले में अब तक गाजा पट्टी में 2750 के करीब लोगों की जान जा चुकी है। अबतक गाजा से करीब 10 लाख फलस्तीनी विस्थापित हो गए हैं।
यूएनआरडब्ल्यूए गाजा पट्टी में काम करने वाले अपने 14 कर्मचारी को खो चुका है। 10 दिन पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के साथ काम करने वाले कई अन्य कर्मचारी विस्थापित हो गए हैं।