पाकिस्तान महाकंगाल, एक-एक दवा के लिए तड़प सकते हैं मरीज, मात्र 7 दिन का बचा है स्टॉक

इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान की महाकंगाली अब देश के लिए बड़ा दवा संकट बन सकता है। पाकिस्‍तान की दवा निर्माता कंपनियों ने धमकी दी है कि वे उत्‍पादन बंद कर सकती हैं। इन कंपनियों ने कहा कि रुपये के दाम में ऐतिहासिक गिरावट आने की वजह से उत्‍पादन की लागत बढ़ गई है। उन्‍होंने कहा कि अगले 7 दिन से ज्‍यादा का दवाइयों का स्‍टॉक अब उत्‍पादन करना और उसे मुहैया कराना उनके लिए ‘पूरी तरह से असंभव’ हो गया है। पाकिस्‍तानी मीडिया के मुताबिक देश की 10 बड़ी दवा कंपनियों ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को चेतावनी दी है।

इन पाकिस्तानी  कंपनियों ने दावा किया कि वे अपने उत्‍पादन को बंद करने जा रही हैं। उन्‍होंने मांग की कि सरकार तत्‍काल दवाइयों के दाम बढ़ाए नहीं तो उनके लिए उत्‍पादन को बंद करना ही एकमात्र विकल्‍प होगा। पाकिस्‍तानी दवा निर्माता कंपनियों के संगठन के पूर्व चेयरमैन काजी मंसूर ने कहा कि रुपये के अवमूल्‍यन और कई सामानों के दाम में भारी बढ़ोत्‍तरी के कारण दवाओं के उत्‍पादन की लागत कई गुना बढ़ गई है। उन्‍होंने कहा कि दवाओं के निर्माण में जरूरी एपीआई की कीमतों और पैकेजिंग के सामान के दाम में वृद्धि के कारण, दवा कंपनियों के लिए यह व्‍यवहारिक नहीं रह गया है कि वे दवाओं को वर्तमान दाम में बेचें।’

रुपये के मूल्य में 67 फीसदी गिरावट

इन कंपनियों ने पाकिस्‍तानी स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री अब्‍दुल कादिर पटेल को लिखे पत्र में कहा कि स्‍थानीय दवा निर्माता इंडस्‍ट्री कच्‍चे माल पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है जो विदेश से मंगाया जाता है। यह कच्‍चा माल आता है तभी पाकिस्‍तान के अंदर दवाओं का निर्माण किया जा सकता है। कंपनियों ने कहा कि एपीआई के दाम में भारी बढ़ोत्‍तरी से दवा उद्योग को बड़ा झटका लगा है। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इससे दवाओं के दाम में भारी बढ़ोत्‍तरी हुई है। उन्‍होंने यह भी कहा कि तेल के दाम में बढ़ोत्‍तरी से भी दवा उद्योग पर भारी मार पड़ी है।

दवाई को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में आ रही काफी परेशानी

 

कंपनियों ने कहा कि दवा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में भी काफी परेशानी हो रही है। पाकिस्‍तानी दवा उद्योग ने यह धमकी ऐसे समय पर दी है जब पाकिस्‍तानी रुपये के दाम में डॉलर के मुकाबले जुलाई 2020 से अब तक 67 फीसदी गिरावट आई है। कंपनियों ने कहा कि पाकिस्‍तान में कोरोना, बाढ़, डेंगू समेत कई स्‍वास्‍थ्‍य आपदाएं आने के बाद भी दवाओं को तय समय पर दिया गया था लेकिन अब कंपनियों के लिए भारी मुश्किल पैदा हो गई है। इसी वजह से ये कंपनियां अब सरकार को तत्‍काल दाम बढ़ाने के लिए कह रही हैं। उन्‍होंने कहा कि अगर दाम नहीं बढ़ाए गए तो पूरा स्‍थानीय दवा उद्योग तबाह हो जाएगा।

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