बिलासपुर. रेलवे की लचर व्यवस्था और ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी से यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है. रविवार को इंदौर से बिलासपुर आने वाली नर्मदा एक्सप्रेस की सुस्त रफ्तार और बिलासपुर स्टेशन के आउटर पर लंबे समय तक रोके जाने से यात्री हलाकान हो गए. उसलापुर से बिलासपुर के बीच महज छह किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेन को करीब डेढ़ घंटे लग गए. ट्रेन के आगे नहीं बढ़ने से परेशान कई यात्री तिफरा ओवरब्रिज के पास उतरने को मजबूर हो गए.
18233 इंदौर-बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस रविवार को अपने निर्धारित समय से काफी देरी से दोपहर 3:12 बजे उसलापुर स्टेशन पहुंची. इसके बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि ट्रेन जल्द ही बिलासपुर जंक्शन पहुंच जाएगी, लेकिन कुछ किलोमीटर का सफर भी रेलवे समय पर पूरा नहीं करा सका. ट्रेन धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही और आखिरकार शाम साढ़े चार बजे के बाद बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची.
आउटर पर खड़ी रही ट्रेन, यात्रियों का बढ़ा गुस्सा
बिलासपुर स्टेशन से करीब छह किलोमीटर पहले आउटर पर ट्रेन को लंबे समय तक रोके जाने से यात्रियों का धैर्य जवाब देने लगा. ट्रेन आगे नहीं बढ़ रही थी और यात्री समय की बर्बादी से परेशान थे. ऐसे में कई यात्रियों ने इंतजार करने के बजाय तिफरा ओवरब्रिज के पास ही ट्रेन से उतरना उचित समझा. आउटर पर ट्रेनें रोकने की समस्या नई नहीं है. आए दिन ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने और स्टेशन के बाहर अटकने के कारण यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री बेहाल
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन में यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी लगातार परेशानी का कारण बन रही है. समय पर जोन में प्रवेश करने के बाद भी ट्रेनों के गंतव्य तक पहुंचने में देरी हो रही है. नर्मदा एक्सप्रेस की घटना ने रेलवे की परिचालन व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सिग्नलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यात्रियों को यह समझ नहीं आ रहा कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कितनी देर और इंतजार करना पड़ेगा.
पूजा स्पेशल का 34 घंटे का सफर 70 घंटे में पूरा
त्योहारी सीजन में घर पहुंचने की उम्मीद लेकर यात्रा कर रहे लोगों के लिए विशेष ट्रेनें भी परेशानी का कारण बन रही हैं. संतरागाछी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 01108 संतरागाछी-एलटीटी एसी पूजा स्पेशल अपने निर्धारित समय से 35 घंटे से अधिक की देरी से गंतव्य पर पहुंची. करीब 34 घंटे में पूरा होने वाला सफर लगभग 70 घंटे में पूरा हुआ.
एसी श्रेणी का भारी किराया चुकाने के बावजूद यात्रियों को लंबी देरी झेलनी पड़ी. ट्रेन में पेंट्री कार और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गईं. त्योहार के समय घर पहुंचने की जल्दबाजी के बीच ट्रेन में फंसे यात्रियों को खाने-पीने की सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा.