ईरान ने जिस नरगिस को 154 कोड़े की सजा दी, 31 साल के लिए जेल में डाला, उन्हें मिला शांति का नोबेल

ईरान: ईरान में महिला अधिकारों, लोकतंत्र और मृत्युदंड के खिलाफ वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहीं और इस समय जेल में बंद कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई। नॉर्वे नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने शुक्रवार को ओस्लो में पुरस्कार की घोषणा की। मोहम्मदी (51) ने अपने आंदोलन की वजह से बार-बार गिरफ्तार होने और जेल जाने के बावजूद अपना काम जारी रखा।
रीस-एंडरसन ने कहा, ‘‘सबसे पहले यह पुरस्कार ईरान में पूरे आंदोलन के लिए बहुत अहम कार्य और उसकी निर्विवाद नेता नरगिस मोहम्मदी को मान्यता देने के लिए है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘‘इस सम्मान से इस आंदोलन को, चाहे जिस भी रूप में हो, जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।” रीस-एंडरसन ने ईरान से अपील की कि वह मोहम्मदी को रिहा कर दे, ताकि वह 10 दिसंबर को आयोजित पुरस्कार समारोह में शामिल हो सकें। मोहम्मदी के करीब पूरे जीवन में ईरान पर सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में शिया धर्म तंत्र का शासन रहा है।
ईरान में महिलाएं नौकरी कर सकती हैं, शैक्षणिक पदों पर आसीन हो सकती हैं और यहां तक उनकी सरकार में नियुक्ति हो सकती है, लेकिन उनकी जिंदगी कड़े नियंत्रण में है। कानून के तहत सभी महिलाओं को सिर ढकना होता या हिजाब पहनना होता है, ताकि धर्मपरायण होने के प्रतीक के तौर पर उनके बाल ढके रहे। ईरान और पड़ोसी देश अफगानिस्तान ही ऐसे देश हैं, जहां पर इस नियम का अनुपालन करना अनिवार्य है। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए गए बयान में मोहम्मदी ने कहा, ‘‘मानवाधिकार के लिए मेरे आंदोलन को मिला वैश्विक समर्थन और मान्यता मुझे और दृढ़, जिम्मेदार, जुझारू और आशावान बनाता है।”
13 बार जेल, 31 साल कारावास की सजा
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इस मान्यता से बदलाव के लिए ईरानियों का प्रदर्शन और मजबूत व संगठित होगा। जीत नजदीक है।” रीस-एंडरसन ने बताया कि मोहम्मदी 13 बार जेल गईं और उन्हें पांच बार दोषी करार दिया गया, उन्हें कुल 31 साल कारावास व 154 कोड़े की सजा सुनाई गई है। मोहम्मदी की हालिया गिरफ्तारी 2021 में तब हुई, जब उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में मारे गए एक व्यक्ति की याद में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्हें तेहरान के कुख्यात इविन कारागार में रखा गया है। इसी जेल में पश्चिमी देशों से संपर्क रखने के आरोपियों और राजनीतिक कैदियों को रखा गया है।
जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शामदासानी ने कहा, ‘‘ईरान की महिलाएं दुनिया के लिए प्रेरणा हैं। प्रतिशोध, धमकी, हिंसा और हिरासत के सामने उनका साहस और दृढ़ संकल्प उल्लेखनीय रहा है।” उन्होंने कहा, ‘‘हम उनकी और ईरान में हिरासत में लिये गए मानवाधिकार के सभी रक्षकों की रिहाई की मांग करते हैं।” मोहम्मदी 19वीं महिला हैं, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जबकि यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी ईरानी महिला हैं।
122 साल के इतिहास में पांचवी बार दिय़ा गया नोबेल पुरस्कार
मोहम्मदी से पहले 2003 में शिरिन इबादी को शांति के नोबेल पुस्कार से सम्मानित किया गया था। नोबेल पुरस्कार के 122 साल के इतिहास में यह पांचवी बार है, जब शांति पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जो कारागार में था या नजरबंद था। पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं में शामिल बेलारूस के मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की भी कारागार में थे। वह अब भी जेल में हैं। मोहम्मदी हाल में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए जेल में हैं।