मुख्तार अंसारी के बेटे उमर को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, निष्क्रांत संपत्ति मामले में मिली अग्रिम जमानत

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जेल में बंद गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को निष्क्रांत संपत्ति मामले में अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।

उच्च न्यायालय ने रद्द की थी याचिका

उच्च न्यायालय ने 13 अप्रैल को अग्रिम जमानत की मांग करने वाली उमर की याचिका खारिज कर दी थी। न्यायालय ने मुख्तार अंसारी के दूसरे बेटे अब्बास अंसारी की याचिका भी खारिज कर दी थी, जिसमें उसी मामले में आरोप पत्र को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने दोनों भाइयों द्वारा स्वतंत्र रूप से दायर की गई दो याचिकाओं पर आदेश पारित किया गया था।

दादी के जाली हस्ताक्षर करने का आरोप

अंसारी भाइयों की ओर से दलील दी गई कि संपत्ति का म्यूटेशन उनके जन्म से पहले उनके पूर्वजों के नाम पर था और इसलिए उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। राज्य के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि दोनों पर अपनी दादी के जाली हस्ताक्षर करने का भी आरोप लगाया गया था और इसलिए, उनके खिलाफ स्पष्ट अपराध बनता है।

2020 में दर्ज हुआ था मामला

मामले की एफआईआर राजस्व अधिकारी सुरजन लाल ने 27 अगस्त, 2020 को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि मुख्तार और उनके बेटो ने फर्जी दस्तावेज बनाकर निष्क्रांत संपत्ति हड़प ली थी।

गौरतलब है कि निष्क्रांत संपत्ति शब्द का उपयोग विभाजन के दौरान पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। ये आम तौर पर उन लोगों को आवंटित किए जाते हैं, जो उस दौरान पाकिस्तान से भारत चले आए थे।

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