हंगामेदार होगा संसद का मानसून सत्र, विवादास्पद दिल्ली सेवा अध्यादेश को लेकर हो सकता है फैसला

नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसकी जानकारी दी। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के बीच इस बार संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। आगामी सत्र में एक तरफ जहां सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर सकती है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्‍ली में लाए गए केंद्र के अध्‍यादेश के खिलाफ मोर्चा खोल सकती है।

प्रल्हाद जोशी ने की अपील

इन सभी के बीच प्रहलाद जोशी ने कहा कि मानसून सत्र में विवादास्पद दिल्ली सेवा अध्यादेश को एक कानून के रूप में लाया जा सकता है। 20 जुलाई से 11 अगस्‍त तक चलने वाले मॉनसून सत्र में 17 बैठकें होंगी। प्रह्लाद जोशी ने मॉनसून सत्र का शेड्यूल बताते हुए ट्वीट किया- ‘मैं सभी पार्टियों से सत्र के दौरान संसद के विधायी और अन्य कामकाज में रचनात्मक योगदान देने की अपील करता हूं।’

अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पहले ही दिल्ली सेवा अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है। हालांकि, सत्र के दौरान उठाए जाने वाले विधायी कार्यों की सूची अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन अगर सरकार अध्यादेश की जगह कानून लाने या पारित करने के लिए आगे बढ़ती है तो संसद में हंगामा बढ़ सकता है।

बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रही विपक्ष

अब तक, कांग्रेस को छोड़कर अधिकांश विपक्षी दलों ने उच्च सदन में विधेयक के पारित होने का विरोध किया है। इस महीने पटना में विपक्षी नेताओं की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केजरीवाल को बताया था कि उनकी पार्टी सिद्धांत रूप में संविधान और उसके संघीय सिद्धांतों पर किसी भी हमले का विरोध करेगी।

हालांकि, पार्टी ने AAP को औपचारिक रूप से समर्थन देने का वादा करते हुए कहा था कि संसद सत्र बुलाए जाने के बाद इस मुद्दे पर एक संयुक्त विपक्ष की रणनीति तैयार की जाएगी और सभी गैर-भाजपा दल विधायी एजेंडे पर आम कार्य योजनाओं पर चर्चा करने के लिए मिलेंगे।

राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक भी होगा पेश

विपक्षी दल मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा पर भी सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे, जो मई की शुरुआत से करीब दो महीने से लगातार जारी है। कुछ दिन पहले समान नागरिक संहिता लागू करने की जरूरत पर प्रधानमंत्री के जोर देने पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिससे यह भी सुनिश्चित होने की उम्मीद है कि दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामेदार होगी।

उम्मीद है कि सरकार राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक भी पेश करेगी, जिसे इस सप्ताह कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह प्रस्तावित फाउंडेशन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में देश की अनुसंधान क्षमता को बढ़ाने के लिए एक नई फंडिंग एजेंसी होगी।

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