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पंचायत सभा के दौरान गिरी आकाशीय बिजली, नाबालिग की मौत, सरपंच-सचिव सहित कई ग्रामीण आए चपेट में 

Chhattisgarh September 15, 2025 रिपोर्टर: shailesh
पंचायत सभा के दौरान गिरी आकाशीय बिजली, नाबालिग की मौत, सरपंच-सचिव सहित कई ग्रामीण आए चपेट में 

पंचायत सभा के दौरान गिरी आकाशीय बिजली, नाबालिग की मौत, सरपंच-सचिव सहित कई ग्रामीण आए चपेट में 

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ओड़गी ब्लॉक के ग्राम पंचायत पाल केवला अगरिया पारा में उस वक्त हाहाकार मच गया, जब आकाशीय बिजली गिरने से एक नाबालिग की मौके पर ही मौत हो गई. छह अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को गहरा दुख दिया, बल्कि क्षेत्र की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को भी उजागर कर दिया.

इस मामले पर हो रही थी सभा 

दरअसल घटना उस समय हुई जब पाल केवला गांव में एक पारिवारिक विवाद के समाधान के लिए पंचायत सभा आयोजित की गई थी. सभा में ग्राम सरपंच मुकदेव चेरवा, सचिव पनालाल सिंह और जनपद सदस्य समेत अनेक ग्रामीण मौजूद थे.उसी दौरान 17 वर्षीय विजय चेरवा पास की एक किराना दुकान से पानी और नमक लाने के लिए मोटरसाइकिल से गया था और जैसे ही लौटा बाईक खड़े भी नहीं कर पाया था कि अचानक तेज गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरी. जिसकी चपेट में आने से विजय की मौके पर ही मौत हो गई.

बिजली गिरने की चपेट में आए अन्य लोगों में तीन महिलाएं, एक बच्ची और दो अन्य ग्रामीण शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल हो गए. बिजली की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सरपंच, सचिव और जनपद सदस्य भी कुछ देर के लिए बेहोश हो गए.

स्वास्थ्य केंद्र बंद, एंबुलेंस नदारद

हादसे के बाद सबसे बड़ा झटका तब लगा जब घायलों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल सका. नजदीकी छतरंग स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक नर्स NHM पदस्थ है, जो वर्तमान में हड़ताल पर है. केंद्र पर न कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही पैरामेडिकल स्टाफ.यही नहीं 108 एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच सकी. अंत में गंभीर घायलों को महतारी एक्सप्रेस 102 की मदद से कोरिया जिले के सोनहत अस्पताल पहुंचाया गया.

प्रशासनिक लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

मृतक विजय का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. वहीं, घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर किया. उनका कहना है कि समय पर इलाज और एंबुलेंस की सुविधा मिलती तो शायद स्थिति कुछ और होती. यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि आपदा की स्थिति में दूरस्थ गांवों में राहत और स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर है.जिनके सुधार के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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