ये भयावह मामला था, रिहाई का आधार क्या था…बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के वो 5 चुभते सवाल

नईदिल्ली। 15 अगस्त 2022 आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा था. देश की आजादी का जश्न था मगर बिलकिस बानो के घर मातम पसरा था. बिलकिस बानो रेप मामले में 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया था. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. 27 मार्च को सुनवाई हुई. जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कई याचिकाओं को एक कर सुनवाई शुरू की. दोनों तरफ से दलीलों का सिलसिला शुरू किया. अंत में कोर्ट ने केंद्र सरकार और गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर वो डॉक्युमेंट्स मांगे हैं जिसके आधार पर दोषियों को रिहा किया गया है. केस की अगली तारीख 8 अप्रैल है. इस दिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेजों के साथ पहुंचेगी.

जस्टिस जोसेफ का कहना है कि हमारा एक्सपीरियंस है कि उम्रकैद के कई आरोपी 20 सालों के बाद भी जेलों में सड़ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट को संबंधित सरकारों से उनकी क्षमा याचिकाओं पर विचार के लिए कहना पड़ा. जस्टिस जोसेफ का कहना है कि बिलकिस बानो केस में रिहाई का विशेष आधार क्या है? आसान भाषा में समझें तो सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर सरकार से कहा कि उम्रकैद की सजा तो कई अपराधी काट रहे हैं मगर इस केस में रिहाई का आधार क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के सवाल
1- क्या दोषियों को रिहा करने से पहले आपसे (सॉलिसिटर जनरल ) SV Raju कोई सलाह मशविरा हुआ था.
2- कई जघन्य अपराधों में लिप्त कैदी उम्रकैद का वक्त पूरा होने के बाद भी जेलों में सड़ रहे हैं.
3- दोषियों को रिहा करने के लिए आपके पास आधार क्या है?
4- बिलकिस बानो केस की सुनवाई के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये भयानक था.
5- हमें वो डॉक्यूमेंट्स चाहिए जिसके आधार पर बिलकिस बानो के दोषियों को रिहा किया गया था
6- सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस देते हुए उनके वकील से कहा कि आप 18 अप्रैल को सारे दस्तावेजों के साथ आइये.

बिलकिस बानो की वकील
बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता ने पांच बार सर्वोच्च न्यायालय से अपील की उनका मामला लाइनअप किया जाए. केस सीजेआई चंद्रचूड़ वाली बेंच के सामने आया तो उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन किया जाएगा. सोमवार को सुनवाई हुई तो पीठ ने कहा कि ये अपराध भयानक है.

मामले को समझिए
इस केस की हिस्ट्री पर जाएं तो 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात दंगे की आग में झुलस रहा था. बिलकिस बानो मामले मे 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली थी. इसकी सुनवाई गुजरात से मुंबई ट्रांसफर की गई थी. सभी दोषी 15 साल से अधिक समय तक जेल में रहे. इसके बाद कथित तौर पर जेल में अच्छा आचरण दिखाने के बाद उनको रिहा कर दिया गया. हालांकि मुंबई की ट्रायल कोर्ट और सीबीआई इस आधार पर रिहा करने के सख्त खिलाफ थे.

सुभाषिनी के तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल
याचिकाकर्ता सुभाषिनी अली ने भी बिलकिस बानो मामले में याचिका दायर की थी. उनकी तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल. उन्होंने कहा कि ये नॉर्मल केस नहीं है. बल्कि सावर्जनिक महत्व का मामला है.हम किसी पर केस करना नहीं चाहते लेकिन चाहते हैं कि ये जेल से अपराधियों को छोड़ने वाली जो पॉलिसी है वो क्लियर हो जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या 1992 के बाद Remission Policy में कोई बदलाव या संशोधन हुआ है. जस्टिस जोसेफ अगली तारीख 18 अप्रैल निर्धारित की है. दरअसल वो 17 जून को रिटायर हो जाएंगे और 19 मई से SC 45 दिन के लिए बंद हो जाता है.

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