Holika Dahan : चार शुभ योगों के साथ फाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन आज, जान लें शुभ मुहूर्त

फाल्गुन शुक्ल पक्ष स्नान-दान, व्रत, पूर्णिमा मंगलवार सात मार्च को यानी आज है। इस तिथि पर होलिका दहन की परंपरा है। इसके अगले दिन यानी चैत्र प्रतिपदा बुधवार मार्च मार्च को रंगों वाली होली धूमधाम से खेली जाएगी। होलिका दहन पर चार विशेष योगों वाशी, सुनफा, शंख और सुकर्मा का संयोग बन रहा है। फाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन किया जाएगा। पं
पंडित जी के अनुसार इस वर्ष पूर्णिमा दो दिन होने से सोमवार को भी होलिका दहन हुआ है, लेकिन भोपाल में सात मार्च मंगलवार को ही मुहूर्त समय में होलिका दहन होगा। शहर में कहीं सोमवार को होलिका दहन नहीं हुए हैं। वहीं पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि मंगलवार को ही फाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन किया जाएगा। आठ मार्च को होली खेली जाएगी।
होलिका दहन पूजा, मुहूर्त : शाम 06:24 से रात 08:51 होलिका दहन की अवधि, दो घंटे 27 मिनट रहेगी। रंग खेलने वाली होली आठ मार्च को मनाई जाएगी।
इन राशियों के लिए शुभ फलदायी
मेष राशि के जातकों के लिए होलिका दहन के बाद से अच्छे पलों की शुरुआत हो सकती है। बृहस्पति ग्रह मीन राशि में हैं, लेकिन नए सनातन साल में मेष में गोचर करेगा। ऐसे में अभी से मेष राशि वालों के सुख और समृद्धि के द्वार खुलने की संभावना है। मिथुन राशि वालों के रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होने और आर्थिक स्थिति मजबूत बनने के योग बन रहे हैं। सिंह राशि के लोगों पर देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा रहेगी। धनु व मीन राशि के जातकों पर त्रिग्रही योग का विशेष प्रभाव पड़ेगा।
होलिका दहन की पौराणिक कथा
असुरराज हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद उतना ही बड़ा विष्णु भक्त था। बेटे की विष्णु भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप बहुत ही दुखी और क्रोधित होता था। उसने अपने बेटे को कई बार विष्णु भक्ति से दूर करने का प्रयास किया. यहां तक की उसने अपने राज्य में विष्णु पूजा को प्रतिबंधित कर दिया था। उसके राज्य के लोग डर से हिरण्यकश्यप की ही पूजा करते थे।
उसके काफी प्रयासों के बाद भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। तब हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की पूजा से दूर करने के लिए पुत्र को यातनाएं देना प्रारंभ कर दिया। भक्त प्रह्लाद को कभी पहाड़ से नीचे फेंका गया तो कभी हाथी के पैरों तले रौंदने का प्रयास किया गया। लेकिन हर बार श्रीहरि विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए।
यह देखकर हिरण्यकश्यप और भी क्रोधित हो गया। उसने अपनी बहन होलिका को अपने पुत्र प्रह्लाद को जलाकर मारने के लिए कहा। होलिका को एक दिव्य चादर प्राप्त थी, जिसको ओढ़ लेने से उस पर आग का प्रभाव नहीं होता था. होलिका हिरण्यकश्यप के आदेश को मानते हुए फाल्गुन पूर्णिमा की रात प्रह्लाद को मारने के लिए तैयार हो गई।
होलिका ने स्वयं वह दिव्य चादर ओढ़ ली और प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई। प्रह्लाद भगवान विष्णु का नाम जपते रहे. श्रीहरि की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गए और होलिका उस आग में जलकर भस्म हो गई। इस तरह से अधर्म पर धर्म की जीत हुई। इसीलिए हर साल फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है।
7 मार्च मंगलवार – होलिका दहन
8 मार्च बुधवार – रंगोत्सव (धुलेंडी)
9 मार्च गुरुवार – भाईदूज, भगवान चित्रगुप्त के साथ कलम-दवात पूजा होगी।
10 मार्च शुक्रवार – गणेश चतुर्थी
12 मार्च रविवार – रंगपंचमी के साथ होली पर्व का समापन होगा।