नवरात्रि में अद्भुत संयोग: आरती के दौरान निकला नाग, श्रद्धालुओं में आस्था का ज्वार

सूरजपुर। नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां एक ओर देशभर में देवी मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल है, वहीं छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले स्थित प्रसिद्ध कुदरगढ़ देवी मंदिर में एक अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने को मिला, जिसने भक्तों के मन में आस्था की लहर और भी प्रबल कर दी।
दरअसल, नवरात्रि के सातवें दिन, जब मां कालरात्रि की पूजा की जा रही थी, उस दौरान मंदिर में आरती के समय एक नाग प्रकट हो गया। यह घटना न सिर्फ वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए चौंकाने वाली थी, बल्कि उन्होंने इसे ईश्वरीय संकेत और देवी मां की कृपा के रूप में देखा।
आरती के दौरान नाग की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
मंदिर के मुख्य पुजारी बैगा माता की आरती कर रहे थे, तभी चरण कुंड के पास हलचल महसूस हुई। उन्होंने जैसे ही पास की जाली हटाई, वहां से एक नाग बाहर निकल आया। हैरानी की बात यह रही कि नाग ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और शांत रूप से प्रकट होकर चला गया।
इस दृश्य को देखकर श्रद्धालु भक्ति भाव में और अधिक डूब गए। उनका कहना है कि नवरात्र में इस प्रकार नाग का प्रकट होना देवी मां के आशीर्वाद का प्रतीक है। साथ ही, लोगों ने इसे भगवान शिव की उपस्थिति से भी जोड़ा क्योंकि सर्प शिव के गले का अलंकार माने जाते हैं।
कुदरगढ़ मंदिर: श्रद्धा, रोमांच और प्रकृति का संगम
सूरजपुर जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर, ओडगी विकासखंड में स्थित मां बागेश्वरी देवी का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
- मंदिर करीब 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 900 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।
- रास्ते में प्राकृतिक जलप्रपात और हरियाली से भरे दृश्य भक्तों को एक अलौकिक अनुभव देते हैं।
- नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेला भी लगता है, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मां बागेश्वरी देवी: मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी
ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मां बागेश्वरी की पूजा करने वालों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। खासकर चैत्र और क्वार नवरात्रि में इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का माहौल देखते ही बनता है।
घने जंगलों और ऊँची पहाड़ियों से घिरा यह स्थान धार्मिक के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद मनोहारी है।