भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को सिर पर लेकर निकले सीएम भूपेश, रथ के आगे सोने के झाड़ू से बुहारा

रायपुर : भगवान जगन्नाथ 15 दिनों बाद स्वस्थ होने पर परंपरानुसार रायपुर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होने शहर के प्रसिद्ध गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा के शुभारंभ के अवसर पर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके बाद रथयात्रा से मुख्यमंत्री पूजा करके प्रतिमाओं को सिर पर विराजित करके रथ तक लेकर आए। मुख्यमंत्री ने रथयात्रा से पहले छेरापहरा (रथ के आगे सोने से बनी झाड़ू से बुहारना) की रस्म अदा की। इसे प्राचीन समय में राजा-महाराजा निभाते थे।
इस रस्म को निभाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आमंत्रित किया गया। 11 पंडितों के सानिध्य में विशेष पूजा-अर्चना, हवन के पश्चात छेरापहरा की रस्म निभाई गई। इसके बाद कुछ देर में श्रीविग्रह को मंदिर से बाहर लाकर रथ पर विराजित किया जाएगा। रथ पर विराजित श्रीविग्रह की आरती करके रथ के आगे सोने से निर्मित झाड़ू बहारने की रस्म निभाकर रथयात्रा को रवाना करेंगे।
इससे पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 4 जून को स्नान करने से भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो गए थे। भगवान के अस्वस्थ होने से मंदिरों के पट 15 दिनों से बंद थे। सोमवार को भगवान स्वस्थ हो गए और नेत्र खोलने की परंपरा निभाई गई।मंदिरों में धूमधाम से नेत्रोत्सव मनाया गया। भगवान के नेत्र खोलने के अवसर पर पूजन, आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।
15 दिन बाद खुले जगन्नाथ मंदिर के पट, नेत्रोत्सव की रस्म निभाई
पुरानी बस्ती के टुरी हटरी इलाके के प्राचीन मंदिर के अलावा गायत्री नगर, सदरबाजार के मंदिरों में भी नेत्रोत्सव मनाया गया। श्री जगन्नाथ सेवा समिति के प्रमुख पुरंदर मिश्रा ने बताया कि पिछले पूर्णिमा के पश्चात पिछले 15 दिनों में पंचमी, नवमीं, एकादशी और अमावस्या को औषधियुक्त काढ़ा पिलाने की रस्म निभाई गई थी। अब भगवान पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं। वे अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए 20 जून को रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करने निकलेंगे।
नंदीघोष, तालध्वज, देवदलन रथ
मंदिरों में रथयात्रा की तैयारी पूरी कर ली गई है। गायत्री नगर से तीन अलग-अलग रथ पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भैय्या बलदाऊ और बहन सुभद्रा के साथ प्रजा से मिलने जाएंगे। 10 दिनाें तक भगवान अपनी मौसी के घर विश्राम करेंगे। मूल मंदिर से थोड़ी दूरी पर भगवान के विश्राम करने के लिए व्यवस्था की गई है। नंदी घोष नामक रथ पर भगवान जगन्नाथ, तालध्वज रथ पर बलदाऊ और देवदलन रथ पर बहन सुभद्रा विराजमान होंगी।
देवशयनी को लौटेंगे भगवान
मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर में विश्राम करने के पश्चात 10वें दिन भगवान जगन्नाथ, भैय्या बलदाऊ और बहन सुभद्रा देवशयनी एकादशी के दिन वापस मूल मंदिर में लौटेंगे।