छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम ने भारत के पहले ग्लास स्काईवॉक का किया दौरा, सिक्किम के प्रतिष्ठित बौद्ध सर्किट का भी किया अवलोकन

रायपुर : छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आज पेलिंग ग्लास स्काईवॉक और दुनिया की सबसे ऊंची चेनरेज़िग प्रतिमा का दौरा किया, जो उनके सात दिवसीय मीडिया दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा. यह दौरा वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन में सिक्किम के बढ़ते प्रभुत्व को रेखांकित करता है, जो केंद्रीय बजट 2026-27 के उस प्रस्ताव के साथ मेल खाता है जिसमें पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए एक समर्पित योजना शुरू करने की बात कही गई है.

छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम ने भारत के पहले ग्लास स्काईवॉक का किया दौरा

पत्रकारों ने 7,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित भारत के पहले पारदर्शी पुल, पेलिंग ग्लास स्काईवॉक का अनुभव किया. इंजीनियरिंग का यह अद्भुत नमूना 137 फीट ऊंची चेनरेज़िग प्रतिमा और आसपास की हिमालयी चोटियों का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. इस स्थल के निकट 17वीं शताब्दी का सांगा चोएलिंग मठ स्थित है, जो राज्य के सबसे पुराने मठों में से एक है, जहाँ प्रतिनिधिमंडल ने “वज्रयान बौद्ध धर्म” के संरक्षण और साइट के दोनों ओर स्थित सुनहरे प्रार्थना चक्रों (प्रेयर व्हील्स) के सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की.

सिक्किम के प्रतिष्ठित बौद्ध सर्किट का भी किया अवलोकन

सिक्किम ने अब प्रतिमाओं के पवित्र त्रय (triad) को पूरा करके खुद को एक प्रमुख वैश्विक बौद्ध केंद्र के रूप में स्थापित कर लिया है. दक्षिण सिक्किम में भगवान बुद्ध (130 फीट) और गुरु पद्मसंभव (135 फीट), और अब पश्चिम सिक्किम में चेनरेजिग मीडिया टीम ने नवीनतम केंद्रीय बजट में रेखांकित तीर्थयात्रा व्याख्या केंद्रों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय प्रमुख कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को नोट किया. इन पहलों को अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं प्रदान करते हुए मठों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है.

ग्यालशिंग पहुंचने पर, प्रतिनिधिमंडल का अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री सुरेश राय और आईपीआरडी (IPRD) के अधिकारियों द्वारा आधिकारिक स्वागत किया गया. पीआईबी रायपुर के नेतृत्व वाले इस दल को पारंपरिक ‘खादा’ भेंट कर सम्मानित किया गया. यह आदान-प्रदान अंतर-राज्यीय मीडिया संबंधों को मजबूत करने और सिक्किम के रणनीतिक बुनियादी ढांचे तथा सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम को शेष भारत के सामने प्रदर्शित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.

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