चैत्र नवरात्रि घटस्थापना से शुरू; ऐसा है शुभ मुहूर्त, मां दुर्गा की पूजा विधि जानिए

रायपुर : देवी की आराधना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इस दौरान कलश स्थापित कर आदिशक्ति भगवती की पूजा की जाती है. घटस्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे ज्वारा कहा जाता है. नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व रामनवमी के साथ संपन्न होगा.

घटस्थापना के शुभ मुहूर्त पर डालें नजर

दृक पंचांग के अनुसार, घटस्थापना के लिए गुरुवार को दो शुभ समय बताए गए हैं. मुख्य मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक (कुल 50 मिनट) जबकि अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.

यदि मुख्य मुहूर्त में घटस्थापना संभव न हो, तो अभिजित मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है.

धर्म शास्त्रों के अनुसार, घटस्थापना सूर्योदय के बाद और शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए.

पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र और सूर्य की स्थिति

सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 26 मिनट

सूर्यास्त: शाम 6 बजकर 32 मिनट

अमावस्या तिथि: सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक

प्रतिपदा तिथि: सुबह 6:52 से अगले दिन सुबह 4:52 तक

नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद (अगले दिन सुबह 4:05 तक), इसके बाद रेवती

अन्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:39 तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 तक

अमृतकाल: रात 11:32 से देर रात 1:03 तक

नवरात्र के पहले दिन अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 2:00 से 3:30 तक

यमगंड: सुबह 6:26 से 7:57 तक

गुलिक काल: सुबह 9:28 से 10:58 तक

दुर्मुहूर्त: सुबह 10:28 से 11:17 तक

इन समयों में पूजा या घटस्थापना से बचने की सलाह दी जाती है.

नवरात्रि का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से मां की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

नवरात्रि के दौरान पूजा को पूर्ण और फलदायी बनाने के लिए ये सामग्री आवश्यक मानी जाती है.

मां दुर्गा की तस्वीर या कैलेंडर

पूजा चौकी

श्रृंगार सामग्री (लाल चुनरी, सिंदूर, आलता, बिंदी, चूड़ी, काजल आदि)

मिट्टी का बर्तन और जौ

तांबे या मिट्टी का कलश

आम के पत्ते और नारियल

रोली, कुमकुम और अक्षत

फूल-माला, अगरबत्ती, धूप

दीपक और घी/तेल

फल, मिठाई, गंगाजल, कपूर

आरती थाली

चैत्र नवरात्रि 2026: नौ दिनों के देवी रूप

19 मार्च: मां शैलपुत्री

20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी

21 मार्च: मां चंद्रघंटा

22 मार्च: मां कूष्मांडा

23 मार्च: मां स्कंदमाता

24 मार्च: मां कात्यायनी

25 मार्च: मां कालरात्रि

26 मार्च: मां महागौरी (अष्टमी)

27 मार्च: मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)

देवी के आगमन और प्रस्थान का धार्मिक संकेत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा किस वाहन से आती और जाती हैं, इसका विशेष महत्व होता है. इस वर्ष देवी का आगमन डोली पर होगा. डोली पर आगमन को शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है. इसे समाज या देश में चुनौतियों का संकेत माना जाता है. जबकि देवी का प्रस्थान हाथी पर होगा. हाथी को शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. हालांकि कुछ मान्यताओं में इसे भी पूर्ण रूप से शुभ नहीं माना गया है

रामनवमी पर होगा नवरात्र का समापन

नवरात्रि के नौवें दिन रामनवमी मनाई जाती है. इस दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा, झांकियां और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने त्रेता युग में श्रीराम के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना की थी.

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