CG : आदिवासियों की जमीन का फर्जी नामांतरण!, पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार…

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिला सरगुजा में भू माफियाओं के हौसले इतना बढ़े हुए हैं कि वे अब आदिवासियों की पैतृक भूमि को भी फर्जी तरीके से नामांतरण करके बेच रहे हैं. ऐसा ही एक मामले की शिकायत पीड़ित आदिवासी परिवार ने कलेक्टर सरगुजा से की है. कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश देते हुए कहा है कि पीड़ित राजस्व के स्पेशल कोर्ट में धारा 170 ख के तहत परिवाद दायर करें तत्काल सुनवाई होगी.

ग्राम पंचफेड़ी से आया ताजा मामला
पीड़ित नारायण उरांव ने यह भी बताया कि अंबिकापुर जनपद के ग्राम पंचफेड़ी में 0.368 हेक्टेयर की पैतृक संपत्ति बीर सायं साय उरांव पिता दशई उरांव के नाम पर दर्ज है. सरगुजा सेटलमेंट में बीर साय उरांव के नाम पर यह भूमि दर्ज है.

दरअसल पूरा मामला अंबिकापुर शहर से लगे ग्राम पंचफेड़ी का है. जहां के निवासी नारायण उरांव का कहना है कि भूमाफियाओं के द्वारा फर्जी आदिवासी बन राजस्व कर्मियों की मिली भगत से उनकी पैतृक भूमि का नामांतरण करा लिया गया है. जिससे उनका परिवार काफी परेशान हैं. उनके सामने जीविकोपार्जन की समस्या खड़ी हो गई है. पीड़ित ने कलेक्टर सरगुजा के समक्ष गुहार लगा मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की.

“अभिलेखों में छल पूर्वक अपना नाम दर्ज करा लिया”
नारायण उरांव का कहना है कि बीर सायं उरांव का सिर्फ एक पुत्र आवेदक के पिता हीरा सायं थे. जिन्हें पूर्व में भूमि उसके हिस्से में आई थी. पिता हीरा सायं के मृत्यु के बाद उन्हें उत्तराधिकार में यह संपत्ति प्राप्त हुई. जिसका कब्जा दखल, स्वत्व चला आ रहा है. पीड़ित नारायण उरांव ने बताया है कि यह भूमि आदिवासी वर्ग की है. इसके बावजूद भू माफियाओं के द्वारा योजनाबद्ध तरीके से दो गैर आदिवासियों के द्वारा अधिकारियों से सांठ-गांठ कर राजस्व अभिलेखों में छल पूर्वक अपना नाम दर्ज करा लिया गया है.

राजस्व दस्तावेज दिखाया
बीते दिन पीड़ित द्वारा जब खेती के लिए जुताई की गई तो जालसाजों के द्वारा विरोध किया गया. पीड़ित को खेत जोतने से मना कर दिया. इस बीच भूमि में उनका नाम चढ़ने संबंधी राजस्व दस्तावेज दिखाया गया, तो वे चौक गए. उन्होंने कहा कि पैतृक भूमि फर्जी तरीके से दूसरे के नाम कर दिए जाने से उनके समक्ष अब जीविकोपार्जन की समस्या भी उत्पन्न हो गई है. आवेदक नारायण उरांव ने कलेक्टर से उनके पैतृक भूमि पर गैर आदिवासियों के नाम कराए गए फर्जी नामांतरण को रद्द कराए जाने की मांग की. पीड़ित ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपियों पर अपराध दर्ज करने की मांग की है.

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