‘भाजपा ने करोड़ों रुपये का चंदा लिया, पर हमारे खाते सीज कर दिए’, खरगे ने उठाई जांच की मांग

नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने गुरुवार को इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए। कांग्रेस ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं और इलेक्टोरल बॉन्ड्स की एंट्री में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड से पैसे बनाए हैं और उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की। खरगे ने ये भी आरोप लगाया कि चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी के बैंक खाते आयकर विभाग ने सीज कर दिए हैं, इससे चुनाव में बराबरी की लड़ाई कैसे होगी?

खरगे ने लगाए आरोप

बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इलेक्टोरल बॉन्ड्स मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री कहते हैं कि ना खाऊंगा और न खाने दूंगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने इसका पर्दाफाश कर दिया है कि किस तरह से भाजपा ने चुनावी बॉन्ड से पैसे बनाए।’ खरगे ने कहा कि ‘कांग्रेस पार्टी के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। उन्होंने (भाजपा) आयकर विभाग को ऐसा करने का निर्देश दिया। हमारे करीब 300 करोड़ रुपये जब्त हैं। ऐसे में हम चुनाव कैसे लड़ेंगे? हमारे खाते बंद है और उनके खुले हुए हैं। ऐसे में बराबरी का मुकाबला कैसे होगा? हम इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं। जब तक सच बाहर न आए, तब तक उनके खाते भी सीज होने चाहिए।’

कांग्रेस नेताओं ने उठाए ये सवाल

कांग्रेस के संचार विभाग के रिसर्च और मॉनिटरिंग शाखा के प्रभारी अमिताभ दुबे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में कांग्रेस नेता लिखा कि ‘इलेक्टोरल बॉन्ड योजना साल 2017 में शुरू की गई थी, लेकिन जो आंकड़े पेश किए गए हैं, वह अप्रैल 2019 से हैं। आंकड़ों में दानदाताओं की 18,871 एंट्री है, वहीं दान लेने वालों की एंट्री की संख्या 20,421 है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और चुनाव आयोग ये अनियमितता क्यों है?’ अमिताभ दुबे की इस पोस्ट को कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने भी रि-पोस्ट किया है और एंट्री की गड़बड़ी पर सवाल उठाए। मणिकम टैगोर ने पोस्ट में लिखा कि मुझे नहीं लगता कि ये एक संयोग है।

इस मुद्दे पर भी नाराजगी

चुनाव आयोग द्वारा जो आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं, उनमें बॉन्ड खरीदने वाले और इन बॉन्ड को भुनाने वालों के तो नाम हैं, लेकिन यह पता नहीं चलता कि किसने यह पैसा किस पार्टी को दिया? इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ याचिका दायर करने वाले एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने भी इस बात को उठाया है। इस मुद्दे को लेकर एडीआर फिर से सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।

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