ऐसे गुण वालों से रहें अलर्ट, चांडाल के समान व्यवहार करते हैं ये व्यक्ति

आचार्य चाणक्य ने बुरे व्यक्ति से सतर्क रहने के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ में कई जगह सलाह दी है। आचार्य ने कहा है कि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा ज्ञान भी हासिल कर ले, लेकिन उसका व्यवहार व गुण अच्छे नहीं है तो वह ब्राह्मण भी बिलाव के समान होता है। आचार्य चाणक्य ने बुरे व्यक्ति के इन गुणों का भी जिक्र किया है –

परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः

छली द्वेषी मृदुः क्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि जो व्यक्ति हमेशा दूसरों के कार्य बिगाड़ता है, ढोंगी है, अपना ही स्वार्थ सिद्ध करने में लगा रहता है, दूसरों को धोखा देता है, सबसे द्वेष करता है, ऊपर से देखने में अत्यंत नम्र और अंदर से पैनी छुरी के समान है, ऐसे ब्राह्मण को बिलाव या चांडाल कहा गया है।

आचार्य के मुताबिक, जिस व्यक्ति का ध्यान सदा दूसरों के कार्य बिगाड़ने में लगा रहता है, जो सदा ही अपने स्वार्थ की सिद्धि में लगा रहता है, लोगों को धोखा देता है, बिना कारण के ही शत्रुता रखता है, जो ऊपर से कोमल और अंदर से क्रूर है, उस ब्राह्मण को बिलाव के समान निकृष्ट पशु माना गया है।

वापी कूप तडागानामाराम सुर वेश्मनाम्

उच्छेदने निराऽऽशंकः स विप्रो म्लेच्छ उच्यते

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि जो ब्राह्मण पानी के स्थानों, बावड़ी, कुआं, तालाब, बाग-बगीचों और मंदिरों में तोड़- फोड़ करने में किसी प्रकार का भय न अनुभव करते हों, उन्हें म्लेच्छ कहा जाता है। पीने के जल वाले स्थानों, उद्यानों और मंदिरों आदि के निर्माण का धर्मग्रंथों में अत्यधिक महत्व है। आचार्य ने आगे कहा है कि जो व्यक्ति अपने से श्रेष्ठ दूसरों को माने। जनहित के चिंतन में लीन रहे, वही ब्राह्मण है। परोपकार की भावना ही ब्राह्मण की पहचान है।

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