विधानसभा : प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले 665 उद्योग संचालित, नेता प्रतिपक्ष के सवालों से घिरे पर्यावरण मंत्री 

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज प्रदेश में संचालित उद्योगों में प्रदूषण का मामला गूंजा। विपक्ष ने पूछा कि खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले कितने उद्योग संचालित हैं और उन पर रोक लगाने सरकार क्या प्रयास कर रही है। इन उद्योगों के जांच की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले कितने उद्योगों पर कार्रवाई की गई है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने प्रश्नकाल में पूछा कि वर्ष 2024 से जनवरी 2026 तक प्रदेश में कितने हानिकारक प्रदूषण उत्सर्जन करने वाले उद्योगों में ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना की गई है और इसमें कितनी राशि खर्च की गई है। इसके साथ ही विपक्ष ने इन अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास की जानकारी भी मांगी।

जवाब में पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले कुल 665 औद्योगिक इकाइयां इस समय प्रदेश में संचालित है, इन उद्योगों द्वारा बिजली बचाने रात में ईएसपी बंद करने की लगातार शिकायत को देखते हुए 19 बड़े उद्योगों में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना की गई है, इसके लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई है। इसमें एक सिस्टम लगाने में चार से पांच लाख का खर्च आता जिसे उद्योगों से वसूल किए जाने वाले जुर्माना की राशि खर्च की जाती है।

विभागीय मंत्री ने बताया कि इन औद्योगिक अपशिष्ट के निपटान के लिए 50 एकड़ में रिसाइकल प्लांट लगाया गया है जिसमें सिर्फ छत्तीसगढ़ का अपशिष्ट ही डिस्पोज किया जाएगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ने सदन को आश्वस्त कराया कि औद्योगिक प्रदूषण पर रोक लगाने कड़े नियम बनाकर उसका पालन कराएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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