छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का नया प्रभात- समावेशी विकास और आधुनिकता से संवर रहा युवाओं का भविष्य

रायपुर : राज्य में उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाए जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तक, प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र एक बड़े सकारात्मक बदलाव का साक्षी बन रहा है। क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए सुदूर एवं ग्रामीण अंचलों में नए महाविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ संचालित संस्थानों में नए संकायों और विषयों की शुरुआत की जा रही है। इसके अतिरिक्त, बढ़ती छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए सीटों में वृद्धि की स्वीकृति भी दी गई है।
अधोसंरचना और डिजिटल क्लासरूम का विस्तार
अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के तहत भवनविहीन महाविद्यालयों के लिए नए भवनों का निर्माण, पुरानी इमारतों का संधारण और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। पठन-पाठन को तकनीक से जोड़ने के लिए कक्षाओं को स्मार्ट और ई-क्लासरूम में बदला जा रहा है, जहाँ कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नैक मूल्यांकन पर जोर
प्रदेश के शासकीय, निजी एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में स्नातक स्तर (BA, B.Com, B.Sc, BBA, BCA) पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) लागू की जा चुकी है। पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय (बिलासपुर) और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय (खैरागढ़) में वर्ष 2025 से तथा सत्र 2025-26 से चार वर्षीय B.Ed, प्राच्य संस्कृत और B.P.Ed में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास
विद्यार्थियों के करियर मार्गदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महाविद्यालयों में करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की स्थापना और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही, आदर्श शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने के लिए नए पदों का सृजन किया जा रहा है। अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, NSS, NCC, यूथ रेडक्रॉस और योग जैसी गतिविधियों को भी अनिवार्य किया गया है।
राज्य सरकार की ये बहुआयामी नीतियां केवल महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, अधोसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक साथ समृद्ध करने का भागीरथ प्रयास हैं। रूसा की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दूरदर्शी प्रावधानों से प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र आज एक स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहा है, जो हमारे युवाओं को वैश्विक मंच पर सफलता के नए कीर्तिमान रचने के योग्य बनाएगा।