गणगौर व्रत से सुखमय होगा दांपत्य जीवन, सुख-शांति के लिए करें ये खास उपाय

हिंदू धर्म में गणगौर को भारतीय परंपरा में पति और पत्नी का त्यौहार माना जाता है। भारतीय परंपरा में महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करवा चौथ और हरतालिका तीज जैसे कई व्रत रखती हैं। इनके जैसा ही पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है गणगौर। इसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की मूर्ति (जिन्हें गण-गौर भी कहा जाता है) बनाती हैं और दुर्वा और फूल से पूजा करती हैं। इसमें प्रार्थना की जाती है कि उनका वैवाहिक जीवन भी भगवान शिव और मां पार्वती जैसा सुखद, शुभ और लाभदायक हो। पूजा के बाद इन्हें किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित कर दिया जाता है।
गणगौर पूजा: तिथि और शुभ मुहूर्त
फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के साथ इस पर्व की शुरुआत हो जाती है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इस साल 8 मार्च से शुरू होकर 24 मार्च 2023 को समाप्त होगा।
गणगौर 2023 की तिथि – 24 मार्च 2023, शुक्रवार
तृतीया तिथि प्रारंभ- 23 मार्च, शाम 6:20 बजे
तृतीया तिथि समापन- 24 मार्च, शाम 4: 59 बजे
गणगौर का धार्मिक महत्व
गणगौर इस पर्व को सुहागिन और कुंवारी कन्याएं धूमधाम से मनाती हैं। इस दिन माता पार्वती और शिव जी की पूजा करने का विधान है। महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहा पति पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं।
इस व्रत की सबसे दिलचस्प बात ये है कि इस व्रत के बारे में पत्नी अपने पति को नहीं बताती है और न ही प्रसाद खाने के लिए देती हैं।
गणगौर पर करें ये उपाय
शिवमहापुराण के अनुसार गणगौर पर भगवान शिव को लाल सफेद आंकड़े के पुष्प चढ़ाने से शिव की कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन मां पार्वती को दूध अर्पित करने से व्यक्ति को समस्त पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।
परिवार में खुशहाली और सुख के लिए इस दिन मां पार्वती को केलों का भोग लगाएं और उन्हें गरीबों में बांट दें।