CG वन अमले की बड़ी कार्रवाई : दुर्लभ पेंगोलिन की तस्करी करते 4 अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, उड़ीसा बॉर्डर पर घेराबंदी कर पकड़ा

जगदलपुर। जिले में वन विभाग ने पैंगोलिन की तस्करी करते हुए 4 अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। वन विभाग को इन तस्करों के बारे में मुखबिर से सूचना मिली थी, इसके बाद पुलिस ने इन्हें करपावण्ड वन परिक्षेत्र से लगे उड़ीसा बॉर्डर पर घेराबंदी कर धर दबोचा। पुलिस ने इन तस्करों के पास मौजूद जूट के थैले से एक जीवित पैंगोलिन को बरामद किया है, जिसे यह तस्कर ओडिशा से पकड़ कर छत्तीसगढ़ में खपाने की फिराक में थे।

बता दें कि पैंगोलिन एक संरक्षित वन्य प्राणी है, जिसकी तस्करी और व्यापार कानूनन अपराध है। वन विभाग ने पैंगोलिन को अपने कब्जे में लेकर चारों को हिरासत में लिया है। साथ ही तस्करी में प्रयुक्त 2 मोटर सायकल भी जब्त की गई है। गौरतलब है कि पैंगोलिन नेपाल, श्रीलंका, भूटान और भारत के पहाड़ी और हल्के मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है।

भारत में इसे सल्लू सांप भी कहा जाता है। यह एक विलुप्त दुर्लभ प्रजाति का जीव है, जो ज्यादातर एशिया और अफ्रीका में पाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपए में होने के कारण भी पेंगोलिन की तस्करी जमकर की जाती है। खासतौर पर इसकी डिमांड चीन में सबसे ज्यादा है, जो दवाई बनाने में पैंगोलिन के खाल और मांस का इस्तेमाल करते हैं। पैंगोलिन धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से महज चीटियां खाकर अपना जीवनयापन करता आ रहा है।

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले ही 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है। यह एक ऐसा जीव है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक होती है। शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स वाले इन जीवों का मांस भी खूब शौक से खाया जाता है। एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत करीब 27,000 रुपये तक होती है। वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं।

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