वाराणसी में भावुक हुए पीएम मोदी: ‘मैं अभिभूत और भाव विभोर हूं… आज मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया’

वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामांकन से एक दिन पहले सोमवार की शाम बीएचयू गेट के सामने स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ ही रोड शो किया। भाजपा का दावा है कि बीएचयू से काशी विश्वनाथ मंदिर तक आठ किलोमीटर के लंबे रोड शो में करीब पांच लाख शामिल हुए हैं। यह अब तक सबसे सफलतम रोड शो रहा, जो 2:30 घंटे में पूरा हुआ।

लंका चौराहे से अस्सी तक कई मंचों से आरती और शंखनाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत के माध्यम से सर्व समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। रथ पर प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी रहे।

मदनपुरा में मुस्लिम महिलाओं ने हर हर मोदी के नारे लगाते हुए पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। लंका से अस्सी तक कई मंचों से आरती और शंखनाद कर प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। कहीं ढोल-नगाड़े बजे तो कहीं वाद्य यंत्र अपना राग छेड़ रहे थे। जगह जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत हो रहे थे। बटुक, सन्यासियों ने मंत्रोच्चार के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री को देखने के लिए छोटे-छोटे बच्चे बैरिकेडिंग की जाली से झांक रहे थे तो कई महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर खड़ी थीं

भगवा गढ़ में भगवा माहौल, भगवा रथ, मोदी का परिधान भी भगवा

जय श्रीराम के उद्घोष के बीच प्रधानमंत्री ने महामना को माल्यार्पण कर अपार जनसमूह का दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया।  यहां से उन्होंने भगवा रथ से रोड शो की शुरूआत की। लंका चौराहे से संत रविदास द्वार की ओर बढ़े। पूरे मार्ग को इस तरह से सजाया गया था मानों शहर में दिवाली हो।

लंका से विश्वनाथ धाम तक प्रधानमंत्री के लिए बनाए गए 100 ज्यादा मंच पर मौजूद लोग मंगलाचरण, भक्ति गीतों और लोक नृत्यों के साथ ही शंख, शहनाई और डमरू बजा कर प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहे थे। खास वेशभूषा में अर्चक आरती कर मोदी का स्वागत कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड शो के बाद एक्स पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि आज मेरा रोम-रोम काशी के कण-कण का अभिनंदन कर रहा है। रोड शो में आप सबसे जो अपनत्व और आशीर्वाद मिला है, वो अकल्पनीय और अतुलनीय है। मैं अभिभूत और भावविभोर हूं। आपके स्नेह की छांव में 10 वर्ष कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला। तब मैंने कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। आज मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है।

मुझे जब-जब काशी आने का सौभाग्य मिला, हर बार आपने पलक-पांवड़े बिछाए हैं। इस बार यहां के बच्चों से बुजुर्गों तक और नारी शक्ति से मेरे युवा साथियों तक सभी ने बढ़-चढ़कर जो भागीदारी की है, वह सदा के लिए मेरे हृदय-पटल पर अंकित रहेगी।

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