पाक‍िस्‍तान ने बलूच‍िस्‍तान पर कब्‍जा किया, ड्रैगन को बलूच कमांडर ने दी खुली चेतावनी

इस्‍लामाबाद: चाइना-पाकिस्‍तान इकनॉमिक कॉर‍िडोर और नेवल बेस के जरिए बलूचिस्‍तान पर कब्‍जा करने की तैयारी में चीन को बलूच व‍िद्रोहियों ने गंभीर चेतावनी दी है। बलूचिस्‍तान के विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी के एक कमांडर ने वीडियो जारी करके चेतावनी दी है कि चीन और अंतरराष्‍ट्रीय ताकतें बलूचिस्‍तान से दूर रहें। बलूच कमांडर बशीर जैब बलोच ने कहा कि बलूचिस्‍तान एक आजाद मुल्‍क था जिस पर पाकिस्‍तानी सेना ने कब्‍जा किया है। बीएलए के कमांडर ने कहा कि पाकिस्‍तानी सेना बलूचिस्‍तान के प्राकृतिक संसाधनों को बेचकर कर पैसा कमा रही है।

बशीर जैब बलोच ने कहा कि मैं दुनिया के सभी देशों खासकर चीन को यह बताना चाहता हूं क‍ि पाकिस्‍तान के दावे से उलट बलोच एक देश रहा है जिसका इतिहास है। हम दुनिया के इतिहास में एक स्‍वतंत्र और संप्रभु देश हैं। पाकिस्‍तान ने बलूचिस्‍तान पर कब्‍जा किया है। वह बलोच प्राकृतिक संसाधनों को बेचकर पैसा ले रहा है। फिर चाहे वह बलोच समुद्र हो या ग्‍वादर बंदरगार या फिर रेकोदेक की खान हो। पाकिस्‍तान इन सभी प्रॉजेक्‍ट को अंतरराष्‍ट्रीय ताकतों को बेच रही है।

बलूचिस्‍तान में क्‍या कर रहा है चीन?

जैब बलोच ने कहा कि ये विदेशी ताकतें दावा करती हैं कि वे सभ्‍य,लोकतांत्रिक देश हैं और खुद अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए कई युद्ध लडे हैं। ऐसे में इन ताकतों को पाकिस्‍तान के साथ मिलकर बलोच प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने से बचना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तानी सेना के बलूच जमीन से हटने के बाद इन देशों को बलोच लोगों के साथ रिश्‍ते बनाना चाहिए।

बलोच कमांडर ने कहा कि ये प्राकृतिक संसाधन बलोच लोगों का है न कि पाकिस्‍तान और पंजाबी फौज की है। बलोच लोग पाकिस्‍तानी सेना के एजेंटों के खिलाफ भी हैं। इन एजेंटों को बलोच लोगों का प्रतिन‍िधि कहा जाता है लेकिन असल‍ियत में वे पाकिस्‍तानी सेना के एजेंट हैं। वे हमेशा मक्‍कारी करते हैं। वे बलूच जनता के प्रतिनिध‍ि नहीं हैं। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में बलूचों ने चीन के इंजीनियरों पर कई खूनी हमले किए हैं। इन हमलों में अब तक कई पाकिस्‍तानी सैन‍िक और चीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। चीन और पाकिस्‍तान मिलकर ग्‍वादर में सीपीईसी प्रॉजेक्‍ट चल रहे हैं जिसका मकसद बलूच‍िस्‍तान के प्राकृतिक संसाधनों को लूटना और चीन को सीधे हिंद महासागर तक पहुंच मुहैया कराना है।

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