सावन के महीने में करें वरलक्ष्मी व्रत, घर में हमेशा रहेगा माता लक्ष्मी का वास

सावन के महीने में भगवान शिव के साथ ही मां लक्ष्मी की उपासना को भी बहुत फलदायी माना गया है। श्रावण मास की पूर्णिमा से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुक्रवार का दिन बहुत ही शुभ माना गया है। यह दिन तब और भी ज्यादा शुभ और फलदायी हो जाता है, जब यह श्रावण मास में पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी के पूजन से भक्तों को धन, वैभव, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन पूजन करने से आर्थिक समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। आइये जानते हैं इस व्रत की तिथि और पूजन विधि
वरलक्ष्मी व्रत: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल वरलक्ष्मी का व्रत 25 अगस्त को रखा जाएगा। पूरा दिन इनकी पूजा का शुभ मुहूर्त है।
पूजा मुहूर्त सुबह – सुबह 05:55 बजे से सुबह 07:42 बजे तक (सिंह लग्न)
पूजा मुहूर्त (अपराह्न) – दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 02:36 तक (वृश्चिक लग्न)
पूजा मुहूर्त (सन्ध्या) – शाम 06:22 बजे से रात 07:50 बजे तक (कुम्भ लग्न )
पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि) – रात 10:50 बजे से मध्य रात्रि 12:45 बजे तक (वृषभ लग्न)
वरलक्ष्मी का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार मां वरलक्ष्मी, माता लक्ष्मी का ही एक स्वरूप हैं। ये क्षीर सागर से प्रकट हुई हैं और दूध के समान गौर वर्ण वाली हैं। ये लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं। मान्यता है कि मां वरलक्ष्मी की पूजा करने वाले व्यक्ति को कभी भी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। खास बात ये है कि इस व्रत को महिलाएं ही नहीं पुरुष भी करते हैं। ये व्रत मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि राज्यों में प्रचलित है।
कैसे करें पूजन?
मां वरलक्ष्मी की पूजा वैसे ही की जाती है, जैसे माता लक्ष्मी की। इस दिन सुबह स्नान कर इस व्रत का संकल्प करें। पूजा स्थल पर लक्ष्मी माता की प्रतिमा या तस्वीर को लाल रंग के कपड़े पर विराजित करें। फिर धूप, दीप, फल-फल, कुमकुम, चंदन, इत्र, वस्त्र इत्यादि अर्पित करते विधि-विधान से पूजन करें। इसके बाद वरलक्ष्मी की व्रत कथा पढ़ें और आरती करें। शुद्ध मन से किये व्रत का शीघ्र फल मिलता है और घर में हमेशा लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।