अस्पताल से मीना कुमारी की बॉडी लेने के लिए पैसे नहीं थे परिवार के पास, कंगाल थीं एक्ट्रेस

मुंबई : बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत हीरोइनों में शुमार रहीं मीना कुमारी ने कई साल फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। साल 1939 से 1972 के बीच उन्होंने खूब काम किया और नाम कमाया। मीना कुमारी फिल्मों में अकसर दुखभरे किरदार निभातीं। उनकी असल जिंदगी भी काफी दुख और दर्द से भरी रही। इसी वजह से एक्ट्रेस को ‘ट्रेजेडी क्वीन’ कहा जाता था। लेकिन जब मीना कुमारी की 39 साल की उम्र में मौत हुई, तो बहुत ही बुरी स्थिति से गुजर रही थीं। बताया जाता है कि मीना कुमारी तब इस कदर आर्थिक तंगी में थीं, उनके बैंक के खाते में इतने रुपये भी नहीं थे कि लाश को अस्पताल से रिलीज कराया जा सके। ‘थ्रोबैक थर्सडे’ में जानिए यही कहानी:
Meena Kumari का जन्म 1 अगस्त 1933 को हुआ था। तब उनका नाम महजबीन था। मीना कुमारी के पैदा होने पर पिता एकदम नाराज हो गए थे। उन्हें बेटा चाहिए था, लेकिन बेटी हो गई। बेटी के पैदा होते ही पिता उन्हें अनाथालय छोड़ आए थे। पर बाद में जब मन बदला तो कुछ ही घंटों बाद नन्ही मीना कुमारी को घर ले आए। यहीं से मीना कुमारी के दुखों का सिलसिला शायद शुरू हो चुका था। मीना कुमारी फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थीं। उनकी ख्वाहिश स्कूल जाकर पढ़ाई करने की थी। लेकिन घरवालों ने उन्हें फिल्मों में काम के सिलसिले में फिल्म स्टूडियोज ले जाना शुरू कर दिया।
मीना कुमारी की पहली फिल्म और 25 रुपये फीस
डायरेक्टर विजय भट्ट ने मीना कुमारी को ‘लेदरफेस’ में काम दिया। इस फिल्म के लिए मीना कुमारी को 25 रुपये मिले थे। इस तरह मीना कुमारी की बहुत ही छोटी उम्र में फिल्मों में शुरुआत हो गई, और वह परिवार का खर्च चलाने लगीं। मीना कुमारी ने 60 के दशक तक फिल्मों में काम किया। ‘पाकीजा’, ‘बहारों की मंजिल’, ‘फूल और पत्थर’, ‘मंझली दीदी’ और ‘पूर्णिमा’ जैसी दर्जनों फिल्मों के लिए मीना कुमारी को आज भी याद किया जाता है। लेकिन 70 के दशक तक आते-आते वह फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार करने लगीं। फिर वह वक्त भी आया, जब मीना कुमारी इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
31 मार्च 1972 में मौत, लिवर सिरोसिस का शिकार
मीना कुमारी ने 31 मार्च 1972 को आखिरी सांस ली। मीना कुमारी बहुत बुरी तरह बीमार हो गई थीं। उनकी हालत काम करने लायक बिल्कुल भी नहीं रह गई। मीना कुमारी ने पति कमाल अमरोही से खटपट के कारण खुद को शराब के नशे में डुबो लिया था। उनकी निजी जिंदगी में खूब खटपट चल रही थी। ज्यादा शराब की वजह से मीना कुमारी को लिवर सिरोसिस हो गया था, और उसी ने उनकी जान ले ली। तब मीना कुमारी का इलाज एक अस्पताल में चल रहा था, और वहीं उन्होंने आखिरी सांस ली।
कंगाल हो चुकी थीं मीना कुमारी, खाते में नहीं थे 3500 रुपये भी
डायरेक्टर बिमल रॉय की बेटी रिंकी रॉय भट्टाचार्य ने 2014 में ‘रेडिफ’ को दिए इंटरव्यू में इस बारे में बताया था। रिंकी ने कहा था कि मौत के वक्त मीना कुमारी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। 31 मार्च 1972 में जब 3.25 बजे मीना कुमारी ने सेंट एलिजाबेथ नर्सिंग होम में आखिरी सांस ली, तो उनके खाते में 3500 रुपये भी नहीं थे, जो उनकी बॉडी को रिलीज कराने के लिए चाहिए थे। तब डॉक्टरों ने मदद की थी। उन्होंने मीना कुमारी के लिए पैसे भरे, ताकि एक्ट्रेस के परिवार वाले उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर सकें।
सावन कुमार टाक ने गाड़ी बेचकर भरा था 15 हजार का बिल
वहीं फिल्ममेकर सावन कुमार टाक ने भी एक बार ‘फिल्मफेयर’ से बातचीत में बताया था कि उन्होंने मीना कुमारी के आखिरी दिनों में उनका अस्पताल का 15 हजार रुपये का बिल भरा था। इसके लिए उन्होंने अपनी कार तक बेच दी थी। सावन कुमार टाक ने मीना कुमारी की अर्थी को कंधा भी दिया था।