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CG : कार-टीवी नहीं बल्कि दहेज में दूल्हे को दिए जाते हैं 21 जहरीले सांप, नहीं दिया तो टूट जाता है रिश्ता, जानें कहाँ का है मामला

Chhattisgarh July 19, 2023 रिपोर्टर: Javed Akhtar
CG : कार-टीवी नहीं बल्कि दहेज में दूल्हे को दिए जाते हैं 21 जहरीले सांप, नहीं दिया तो टूट जाता है रिश्ता, जानें कहाँ का है मामला

CG : कार-टीवी नहीं बल्कि दहेज में दूल्हे को दिए जाते हैं 21 जहरीले सांप, नहीं दिया तो टूट जाता है रिश्ता, जानें कहाँ का है मामला

कोरबा। शादी-विवाह का मौसम शुरू होते ही हर जगह बैंड-बाजे की आवाज, आतिशबाजियों का शोर, नाचते-गाते बाराती ये सब हमें दिखाई देते है। शादी में दामाद को उनके होने वाले ससुर के द्वारा बहुत से उपहार दिए जाते है जैसे कि कपड़े, फर्नीचर, अंगूठी-चेन और कई बार गाड़ी भी दी जाती है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि देश में एक ऐसी जगह भी है जहां दामाद को उपहार स्वरूप में बहुत ही अजीब दी जाती है। आज हम आपको बताने जा रहे है कि देश के एक हिस्से में शादी के समय होने वाले दामाद को कुछ ऐसा उपहार दिया जाता है जो देखने में और सुनने में बहुत ही खतरनाक है। जिस उपहार की बात हम कर रहे है वो है 21 जहरीले सांप, भले ही सुनने में ये बात अजीब लगें लेकिन ये एक सच्चाई है। आइये जानते है कि देश में कौन सी जगह इस परंपरा को अभी तक निभाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि हमारा पूरा देश न केवल जाति धर्म और संप्रदाय के मामले में विविधता रखता है बल्कि अलग-अलग समुदाय की परंपराएं भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. भारत में शादियों में भी अलग-अलग परंपराएं देखी जाती हैं. इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक समुदाय है, जहां दहेज में वर-वधु को जहरीले सांप दिए जाते हैं. कोरबा जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर स्थित गांव मुकुंदपुर में संवरा सपेरा जनजाति निवासरत है. संवरा जाति की परंपरा है कि इनके यहां विवाह के दौरान दहेज के तौर पर जहरीले सांप दिए जाते हैं।

खास बात यह है कि संवरा जनजाति में यदि दहेज में सांप नहीं दिया गया तो शादी संपन्न नहीं मानी जाती. यही वजह है कि इस जनजाति के लोग भले ही किसी से सांप मांगकर उसे दहेज में दें, लेकिन यह परंपरा उन्हें निभानी ही पड़ती है. ग्रामीणों ने बताया कि पहले दहेज में 2 से लेकर 10 सांप तक भेंट में दिए जाते थे, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या में इजाफा हुआ और वर्तमान में 21 सांप दहेज के रुप में अवश्य दिए जाते हैं. जब तक उनकी व्यवस्था नहीं हो जाती जब तक शादी को टाल दिया जाता है।

ग्रामीणों ने दहेज में सांप देने की प्रथा के बारे में बताया संवरा जनजाति में सांप रोजी-रोटी कमाने का जरिया है. यह लोग रोजगार के लिए सांपों पर आश्रित हैं और सांप दिखाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं. इस जनजाति के लोगों की यह पुश्तैनी परंपरा है, जिसके चलते जनजाति के बुजुर्गों ने दहेज में सांप देने की परंपरा बनाई थी, जो आज भी बदस्तूर जारी है।

दरअसल, इसकी वजह यह है कि दहेज में मिले सांपों से सपेरा समुदाय के लोग अपना परिवार पाल सकते हैं. भले ही सपेरा समुदाय के लोग चार पैसे कमाने के लिए कोई और भी काम करें, लेकिन सांप लेकर घूमना और उससे पैसे कमाना इनकी पुश्तैनी परंपरा है और यही प्रमुख रूप से इनके आजीविका का साधन भी है।

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