मीराबाई चानू की पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह से मांग- मणिपुर मेरा घर है, वहां हिंसा रोकिए

नई दिल्ल्ली : असम में हो रही हिंसा को लेकर ओलंपिक पदक विजेता भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने राज्य मणिपुर में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की अपील की। मई की शुरुआत से ही इस राज्य में दो जातीय समुदायों मैतेई और कुकी के बीच लगातार संघर्ष के कारण उथल-पुथल हो रही है। दो महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष में 150 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई घरों को आग के हवाले किया जा चुका है।

चानू ने सोशल मीडिया पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों को टैग करते हुए मणिपुर को “मदद करने और बचाने” की अपील की। उन्होंने ट्विटर पर अपना एक वीडियो शेयर करते हुए कहा “मणिपुर में हिंसा तीसरे महीने में प्रवेश करने वाली है और अभी तक शांति बहाल नहीं हुई है। हिंसा के कारण राज्य के कई खिलाड़ी प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं, शिक्षा बाधित हो रही है। कई लोगों की जान चली गई है और कई घर बर्बाद हो गए हैं।”

उन्होंने कहा “मणिपुर मेरा घर है।” चानू ने बताया कि वह इस समय यूएसए में आगामी विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “हालांकि मैं मणिपुर में नहीं हूं लेकिन मैं सोचती हूं, देखती हूं और सोचती हूं कि हिंसा कब खत्म होगी। मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से स्थिति को ठीक करने और मणिपुर के लोगों को बचाने की अपील करती हूं।

भारत के मिडफील्डर जैक्सन सिंह ने इस महीने की शुरुआत में कुवैत के खिलाफ सैफ चैम्पियनशिप फाइनल में भारत की जीत के बाद लोगों से मणिपुर में शांति बनाए रखने और लड़ाई न करने का आग्रह किया था। जैक्सन भी मणिपुर राज्य से आते हैं। मणिपुर की स्थिति पर नजर डालें तो राज्य में तीन मई के बाद से मैतेई समुदाय और कुकी के बीच जातीय हिंसा के कारण तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे के लिए मेइतीस की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद हुआ।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मेइतीस मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत है और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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