MVA में सीट बंटवारे के लिए सबसे पहले कांग्रेस ने उठाई आवाज, कहा- योग्यता के आधार पर हो हिस्सेदारी

मुंबई : विधानसभा और लोकसभा के आगामी चुनावों को लेकर सभी पार्टियां तैयारियों में लग गई हैं। विपक्षी पार्टियों का एकमात्र उद्देश्य भाजपा को हराना है। इसी को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी की विस्तारित कार्यकारिणी बैठक हुई, जिसमें विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने उम्मीदवारों की योग्यता के अनुसार सीटों के बंटवारे पर जोर दिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा था कि महाविकास आघाड़ी (MVA) की तीनों पार्टियों (कांग्रेस, एनसीपी, ठाकरे गुट की यूबीटी) ने 16-16-16 सीटों पर चुनाव लड़ने का अघोषित समझौता किया है। हालांकि अजित पवार ने इस तरह के किसी फॉर्मूले की बात को नकार दिया है।

महाविकास आघाडी के रूप में एकसाथ चुनाव लड़ने के लिए सीटों का बंटवारा योग्यता के आधार पर करने की मांग की गई। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि हर सीट का गहन अध्ययन किया जाएगा और उसी आधार पर सीटों के बंटवारे पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संकल्प भाजपा को हराना है और इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए सीटों के बंटवारे को फाइनल किया जाएगा।

पटोले ने कहा कि 2014, 2019 और अब की स्थिति में बहुत फर्क है। कांग्रेस जून के पहले सप्ताह में प्रत्येक सीट की समीक्षा करेगी और निर्णय लेगी। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि महाराष्ट्र कांग्रेस की विचारधारा वाला राज्य है। कांग्रेस ने अपना जनाधार बढ़ाया है। पिछले तीन सालों में सभी चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। भाजपा को हराया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा किया जाएगा।

वहीं, राकांपा नेता अजीत पवार ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा द्वारा जीती गई लोकसभा सीटों पर पहले चर्चा होगी। बाद में एमवीए उम्मीदवारों की सीट बंटवारे पर बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि एमवीए अगले साल का लोकसभा चुनाव शत प्रतिशत मिलकर लड़ेगा। वहीं, पवार ने साफ कर दिया कि सीटों के बंटवारे का कोई फॉर्मूला नहीं है। उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी द्वारा जीती गई सीटों को बरकरार रखने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन इस पर आगे कोई चर्चा नहीं हुई। तीनों दलों के नेताओं को बातचीत कर नामित किया जाएगा।

बता दें, भाजपा ने 2019 में महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से 23 पर जीत हासिल की थी, उसके बाद उसके तत्कालीन गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने 18 सीटें जीती थीं।

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