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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को हुई अपूरणीय क्षति : वन मंत्री केदार कश्यप

Chhattisgarh July 5, 2026 रिपोर्टर: shailesh
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को हुई अपूरणीय क्षति : वन मंत्री केदार कश्यप

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को हुई अपूरणीय क्षति : वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने पंडवानी की महान साधिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित श्रीमती तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोककला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

पंडवानी को दिलाई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि श्रीमती तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, वर्षों की साधना और कठिन परिश्रम के बल पर छत्तीसगढ़ की लोकगायन परंपरा पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने जीवनभर लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया तथा अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को विश्वभर में सम्मान दिलाया।

संघर्ष और समर्पण से भरा रहा जीवन

श्री कश्यप ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रीमती तीजन बाई ने अपनी कला-साधना कभी नहीं छोड़ी। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सांस्कृतिक गौरव का प्रेरणादायी उदाहरण है। आने वाली पीढि़यों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को सहेजने तथा आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।

पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई की योगदान सदैव अमर रहेगी

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों, असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने श्रद्धेय  श्रीमती तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कला, साधना और योगदान सदैव अमर रहेंगे तथा आने वाली पीढि़यों को प्रेरित करते रहेंगे।

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